देहरादून: उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा 2026 को सुगम और संकटमुक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने अभी से कमर कस ली है। यात्रा के दौरान अक्सर होने वाली एलपीजी (LPG), ईंधन और खाद्य सामग्री की किल्लत को रोकने के लिए शासन स्तर पर एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। सरकार का मुख्य फोकस इस बार केवल गैस पर निर्भर न रहकर वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों को मजबूती देने पर है।
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, इस बार यात्रा सीजन का दबाव पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रहने की संभावना है। आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद सरकार ने केंद्र को अपनी रिपोर्ट भेज दी है।
हालांकि, खाद्य एवं आपूर्ति आयुक्त आनंद स्वरूप ने आश्वस्त किया है कि ऑयल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला को टूटने नहीं दिया जाएगा।
यदि किसी कारणवश गैस आपूर्ति बाधित होती है, तो सरकार ने दो मुख्य वैकल्पिक रास्तों पर काम शुरू किया है:
पिछले यात्रा सीजन में उत्तराखंड में रिकॉर्ड 5.14 लाख वाहन पहुंचे थे। इस संख्या को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की भी लगातार समीक्षा की जा रही है। मुख्य सचिव स्तर पर हर दूसरे दिन बैठकें कर फीडबैक लिया जा रहा है ताकि किसी भी पेट्रोल पंप पर ‘नो स्टॉक’ की स्थिति पैदा न हो।
प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और स्थानीय व्यापारियों से संयम बरतने का आग्रह किया है। सचिव धीराज गर्ब्याल ने कहा कि अक्सर घबराहट (Panic Buying) के कारण कृत्रिम संकट पैदा हो जाता है। सरकार हर स्थिति पर नजर रख रही है और नोडल अधिकारियों को तैनात किया गया है ताकि कालाबाजारी पर लगाम कसी जा सके।
बड़ी बातें एक नजर में:
उत्तराखंड सरकार की यह तैयारी दर्शाती है कि वह चारधाम यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा और अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार मानती है। ‘प्लान-B’ के सक्रिय होने से इस बार श्रद्धालुओं को गैस संकट की आंच महसूस नहीं होगी।
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