UTTARAKHAND

चारधाम यात्रा में कैसे जलेंगे चूल्हे? LPG क्राइसिस से निपटने के लिए क्या है सरकार का ‘प्लान B’, जानिए पूरी प्लानिंग

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा 2026 को सुगम और संकटमुक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने अभी से कमर कस ली है। यात्रा के दौरान अक्सर होने वाली एलपीजी (LPG), ईंधन और खाद्य सामग्री की किल्लत को रोकने के लिए शासन स्तर पर एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। सरकार का मुख्य फोकस इस बार केवल गैस पर निर्भर न रहकर वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों को मजबूती देने पर है।

1.11 लाख अतिरिक्त सिलेंडरों की जरूरत, ऑयल कंपनियों को अलर्ट

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, इस बार यात्रा सीजन का दबाव पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रहने की संभावना है। आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद सरकार ने केंद्र को अपनी रिपोर्ट भेज दी है।

  • 7 जिलों का गणित: हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में हर महीने 1.11 लाख अतिरिक्त व्यावसायिक सिलेंडरों की आवश्यकता होगी।
  • प्रतिदिन की खपत: यात्रा मार्ग पर रोजाना लगभग 3,500 अतिरिक्त सिलेंडरों की मांग रहेगी।
  • प्रमुख तीन जिले: उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में अकेले 15 से 16 हजार सिलेंडरों की मासिक डिमांड का अनुमान है।

हालांकि, खाद्य एवं आपूर्ति आयुक्त आनंद स्वरूप ने आश्वस्त किया है कि ऑयल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला को टूटने नहीं दिया जाएगा।

‘प्लान-B’: बिजली और लकड़ी पर जोर

यदि किसी कारणवश गैस आपूर्ति बाधित होती है, तो सरकार ने दो मुख्य वैकल्पिक रास्तों पर काम शुरू किया है:

  • इलेक्ट्रिक कुकिंग: पर्यटन विभाग ने होटल और होमस्टे संचालकों से अपील की है कि वे इंडक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अधिक से अधिक उपयोग करें। इसके लिए ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा रूट पर बिजली की कटौती न हो।
  • जलाऊ लकड़ी का बफर स्टॉक: वन विकास निगम ने राज्य के 26 केंद्रों (टालों) पर 3,354 क्विंटल से ज्यादा जलाऊ लकड़ी का भंडारण कर लिया है। सोनप्रयाग, जोशीमठ, उत्तरकाशी और रायवाला जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों पर लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है ताकि आपात स्थिति में खाना पकाने और पानी गर्म करने की व्यवस्था जारी रहे।

पेट्रोल-डीजल की भी होगी निर्बाध सप्लाई

पिछले यात्रा सीजन में उत्तराखंड में रिकॉर्ड 5.14 लाख वाहन पहुंचे थे। इस संख्या को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की भी लगातार समीक्षा की जा रही है। मुख्य सचिव स्तर पर हर दूसरे दिन बैठकें कर फीडबैक लिया जा रहा है ताकि किसी भी पेट्रोल पंप पर ‘नो स्टॉक’ की स्थिति पैदा न हो।

सरकार की अपील: “धैर्य रखें, घबराएं नहीं”

प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और स्थानीय व्यापारियों से संयम बरतने का आग्रह किया है। सचिव धीराज गर्ब्याल ने कहा कि अक्सर घबराहट (Panic Buying) के कारण कृत्रिम संकट पैदा हो जाता है। सरकार हर स्थिति पर नजर रख रही है और नोडल अधिकारियों को तैनात किया गया है ताकि कालाबाजारी पर लगाम कसी जा सके।

बड़ी बातें एक नजर में:

  • कुल अतिरिक्त सिलेंडर: 1.11 लाख प्रति माह।
  • जलाऊ लकड़ी स्टॉक: 3,354 क्विंटल (26 केंद्रों पर)।
  • मुख्य फोकस: इलेक्ट्रिक कुकिंग और निर्बाध बिजली।
  • निगरानी: मुख्य सचिव द्वारा हर 48 घंटे में समीक्षा।

उत्तराखंड सरकार की यह तैयारी दर्शाती है कि वह चारधाम यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा और अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार मानती है। ‘प्लान-B’ के सक्रिय होने से इस बार श्रद्धालुओं को गैस संकट की आंच महसूस नहीं होगी।

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