
हल्द्वानी: उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए परिवहन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। हर साल लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में परिवहन विभाग ने एक अहम फैसला लेते हुए यात्रा पर जाने वाले सभी व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों के लिए ‘ग्रीन कार्ड’ (Green Card) अनिवार्य कर दिया है।
बिना ग्रीन कार्ड के नहीं मिलेगी एंट्री
परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ग्रीन कार्ड वाले किसी भी कमर्शियल वाहन को चारधाम यात्रा मार्ग पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हल्द्वानी के आरटीओ (RTO) गुरदेव सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रीन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया जोरों पर शुरू कर दी गई है। अब तक कुमाऊं के रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और टनकपुर स्थित आरटीओ कार्यालयों से 101 वाहनों को ग्रीन कार्ड जारी किए जा चुके हैं और यह प्रक्रिया लगातार जारी है।
कैसे मिलेगा ‘ग्रीन कार्ड’? (मुख्य शर्तें)
ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के लिए वाहन मालिकों और चालकों को परिवहन विभाग की एक निर्धारित प्रक्रिया और कड़े मानकों से गुजरना होगा:
- वाहनों की तकनीकी जांच: सबसे पहले वाहन की कड़ी तकनीकी फिटनेस जांची जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वाहन उत्तराखंड के कठिन और घुमावदार पहाड़ी रास्तों के लिए पूरी तरह से फिट है।
- हिल एंडोर्समेंट (Hill Endorsement) अनिवार्य: चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर हिल एंडोर्समेंट होना जरूरी है, जो यह प्रमाणित करता है कि ड्राइवर पहाड़ों पर गाड़ी चलाने के योग्य है।
- विशेष प्रशिक्षण: चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए विशेष प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) से भी गुजरना होगा, ताकि वे मुश्किल पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित कर सकें।
हादसों को रोकना है मुख्य उद्देश्य
आरटीओ गुरदेव सिंह ने कड़े शब्दों में कहा है कि नियमों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। वाहन के पूरी तरह फिट पाए जाने और ग्रीन कार्ड मिलने के बाद ही उसे यात्रा के लिए रवाना किया जाएगा। परिवहन विभाग की इस अहम पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से अपनी चारधाम यात्रा पूरी कर सकें।
