देहरादून। देश में बाघों की राष्ट्रीय गणना (All India Tiger Estimation) अब सिर्फ कैमरा ट्रैप, पदचिह्नों और कागजी रजिस्टरों तक सीमित नहीं रह गई है। घने जंगलों में बाघों की सटीक और वैज्ञानिक गिनती के लिए पहली बार MSTrIPES Ecology मोबाइल ऐप का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा विकसित इस ऐप से गश्त का हर कदम और वन्यजीवों से जुड़ा हर साक्ष्य मौके पर ही डिजिटल रूप से दर्ज हो रहा है।
घने जंगलों में पैदल चलकर बाघों के पदचिह्न (Pugmarks), मल (Scat), खरोंच के निशान, जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता जैसे साक्ष्य जुटाना दुनिया के सबसे कठिन सर्वेक्षणों में माना जाता है। पहले वनकर्मी इन जानकारियों को कागजों पर दर्ज करते थे, जिसके डिजिटलीकरण में समय लगता था और गलती की संभावना रहती थी।
वन अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल बदलाव से बाघों का डेटा पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शी, वैज्ञानिक और विश्वसनीय हो गया है।
जंगलों के अधिकांश इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं होता। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ऑफलाइन मोड में भी पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखता है। वनकर्मी जैसे ही गश्त पूरी कर नेटवर्क वाले इलाके में आते हैं, पूरा डेटा अपने आप केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाता है।
MSTrIPES ऐप से वनकर्मियों की लापरवाही या फर्जी पेट्रोलिंग की संभावना लगभग खत्म हो गई है।
उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व समेत कई वन क्षेत्रों में इस ऐप का फील्ड डेटा एकत्र करने के लिए सफल इस्तेमाल हुआ है। सालों तक नियमित गश्त में टेस्टिंग के बाद अब इसे बाघों की आधिकारिक गणना में शामिल किया गया है। इसके लिए फील्ड स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है।
भारत सरकार के अनुसार, देश की बाघ गणना दुनिया का सबसे बड़ा जैव विविधता सर्वेक्षण है। इसमें MSTrIPES ऐप के साथ-साथ कैमरा ट्रैप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीआईएस (GIS) और फोटो पहचान प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। यह ऐप अब केवल एक जरिया नहीं, बल्कि जंगलों की ‘डिजिटल डायरी’ बन चुका है।
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