देहरादून: उत्तराखंड में अब भूमि विवादों को सुलझाने के लिए राजस्व विभाग अंश निर्धारण वाली खतौनी देने की योजना पर काम कर रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत खाताधारक और सहखातेधारक की भूमि के हिस्से का स्पष्ट विवरण खतौनी में दर्ज किया जाएगा। वर्तमान में, खाताधारक और सहखातेधारक के नाम तो खतौनी में दर्ज होते हैं, लेकिन उनके पास कितनी भूमि है, यह स्पष्ट नहीं होता। इस जानकारी के लिए अक्सर पटवारी की मदद लेनी पड़ती है।
राजस्व विभाग द्वारा अब खाताधारकों को अंश निर्धारण वाली खतौनी उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है, जिससे खाताधारकों को उनकी भूमि का स्पष्ट विवरण मिल सके। इस पहल का उद्देश्य खाताधारक के पास भूमि की सटीक जानकारी सुनिश्चित करना है।
इससे भूमि खरीदने वाले लोगों को भी लाभ होगा, क्योंकि वे यह आसानी से जान सकेंगे कि विक्रेता के पास कितनी भूमि है। इससे भूमि खरीदने-बेचने के दौरान उत्पन्न होने वाले विवादों में कमी आएगी।
राजस्व विभाग के अनुसार, राज्य में 16,000 से अधिक राजस्व गांव हैं। इनमें से कई गांवों में अंश निर्धारण वाली खतौनी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और बाकी गांवों में काम जारी है। इसके साथ ही, गांवों के नक्शों को भी डिजिटाइज करने की प्रक्रिया चल रही है।
सचिव राजस्व, एसएन पांडे ने जानकारी दी कि अंश निर्धारण वाली खतौनी की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं, जिससे जल्द ही यह योजना लागू हो सकेगी।
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