UTTARAKHAND

धामी सरकार @4: जश्न के मंच पर भ्रष्टाचार की ‘जंग’; CM ने कांग्रेस को घेरा तो विपक्ष ने माँगा ‘श्वेत पत्र’, विश्लेषक बोले- ‘शपथ संविधान की ली थी’

देहरादून | उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार साल पूरे होने पर आयोजित ‘4 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम केवल सरकारी उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं रहा, बल्कि यह तीखी सियासी बयानबाजी का अखाड़ा बन गया। मुख्यमंत्री ने जहाँ कांग्रेस के कार्यकाल को भ्रष्टाचार का ‘अंधकाल’ बताया, वहीं विपक्ष ने इसे भाजपा की विफलताओं को छिपाने का पैंतरा करार दिया।

CM धामी का हमला: ‘कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचारी बेखौफ थे’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीधे तौर पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

  • इच्छाशक्ति का अभाव: कांग्रेस सरकार के समय भ्रष्टाचार चरम पर था, लेकिन कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं थी।
  • पहचान को नुकसान: कांग्रेस ने देवभूमि की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को चोट पहुंचाई।
  • जीरो टॉलरेंस: हमारी सरकार ने भ्रष्टाचारियों को चिन्हित कर जेल भेजा। आज राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही शासन का मूल मंत्र है।

“हमारी सख्त नीतियों के कारण आज भ्रष्टाचारी छिपने को मजबूर हैं। हमने राज्य के मूल स्वरूप और देवत्व को बनाए रखते हुए विकास को प्राथमिकता दी है।”— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री


कांग्रेस का पलटवार: ‘9 साल बाद भी अपनी उपलब्धि बताने को कुछ नहीं’

मुख्यमंत्री के आरोपों पर कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना बंद करे। कांग्रेस की मुख्य आपत्तियां:

  1. श्वेत पत्र की मांग: सरकार बेरोजगारी, महंगाई और बजट खर्च की हकीकत पर श्वेत पत्र जारी करे।
  2. जवाबदेही से भागना: 9 साल (केंद्र और राज्य) की सत्ता के बाद भी कांग्रेस को कोसना हास्यास्पद है।
  3. विफलता: रोजगार के अवसरों में भारी कमी आई है और विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।

विश्लेषक की राय: ‘विकास बनाम सांप्रदायिक मुद्दे’

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक जय सिंह रावत ने इस सियासी बहस पर सख्त टिप्पणी की है। उनका मानना है कि सरकार को अतीत की गलतियों के बजाय अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।

रावत के विश्लेषण के 3 मुख्य बिंदु:

  1. लोकायुक्त का सवाल: यदि भ्रष्टाचार मिटाना ही प्राथमिकता थी, तो 4 साल में लोकायुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं हुई?
  2. शपथ की मर्यादा: सरकार संविधान की शपथ लेती है, ‘सनातन’ की नहीं। धामी सरकार विकास से ज्यादा सांप्रदायिक मुद्दों पर सक्रिय दिखी है।
  3. युवा नेतृत्व को सलाह: सीएम धामी युवा हैं, उनमें ऊर्जा है। उन्हें ‘लंबी रेस का घोड़ा’ बनने के लिए विवादित विषयों से दूरी बनाकर ठोस विकास पर काम करना चाहिए।

TV10 INDIA फैक्ट चेक: क्या कहते हैं आंकड़े?

सरकार जहाँ यूसीसी (UCC), सख्त नकल विरोधी कानून और जीएसडीपी में 7.23% की वृद्धि को ऐतिहासिक बता रही है, वहीं विपक्षी दल इन आंकड़ों को जमीन पर बेरोजगारी और पलायन की स्थिति से विरोधाभासी मान रहे हैं।

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