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धनतेरस पर इन 10 शुभ वस्तुओं की खरीदारी लेकर आती है सौभाग्य, जानें क्या है मान्यता

नई दिल्ली: दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है, जिसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष, यह शुभ दिन शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन धन और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तुओं में तेरह गुना वृद्धि होती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

इस अवसर पर लोग सोना-चांदी से लेकर बर्तन और झाड़ू तक की खरीदारी करते हैं। आइए जानते हैं उन 10 शुभ वस्तुओं के बारे में जिन्हें धनतेरस पर खरीदना सौभाग्यशाली माना जाता है और उनके पीछे की मान्यता क्या है।

1. सोना और चांदी:
धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना सबसे शुभ माना जाता है।इन्हें धन और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन इन धातुओं को खरीदने से मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है और घर में धन की वृद्धि होती है।लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने या चांदी के सिक्के, आभूषण या मूर्तियां खरीदते हैं।

2. पीतल और तांबे के बर्तन:
भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अपने हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश लेकर प्रकट हुए थे।यही कारण है कि धनतेरस के दिन पीतल के बर्तन खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।पीतल को भगवान धन्वंतरि की प्रिय धातु भी माना जाता है। तांबे के बर्तनों को भी स्वास्थ्य और शुद्धि से जोड़ा गया है। मान्यता है कि इन बर्तनों को घर लाने से सौभाग्य और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

3. झाड़ू:
धनतेरस पर झाड़ू खरीदना एक अनूठी परंपरा है जिसका विशेष महत्व है। झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और यह घर से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाली मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नई झाड़ू खरीदने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

4. धनिया के बीज:
इस दिन धनिया के बीज खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है। धनिये को समृद्धि और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना गया है।लोग धनतेरस पर धनिया खरीदकर मां लक्ष्मी को अर्पित करते हैं और बाद में इसे अपनी तिजोरी या धन स्थान पर रखते हैं। कुछ लोग इन बीजों को अपने बगीचे में भी बोते हैं, जिसे घर में सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।

5. गोमती चक्र और कौड़ियां:
गोमती चक्र, जो एक विशेष प्रकार का पत्थर है, और कौड़ियों को भी धनतेरस पर खरीदना शुभ होता है। इन्हें मां लक्ष्मी का प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि इन्हें घर में रखने से धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

6. नमक:
धनतेरस के दिन नमक खरीदना भी एक शुभ संकेत माना जाता है। नमक को घर की पवित्रता और संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया नमक घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सुख-समृद्धि लाता है।

7. लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति:
दीपावली पूजन के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्तियों को धनतेरस के दिन ही खरीद लेना शुभ माना जाता है।ऐसा माना जाता है कि इससे पूरे साल घर में धन और अन्न की कमी नहीं होती।

8. खील-बताशे:
धनतेरस के दिन खील और बताशे खरीदना भी शुभता का प्रतीक है। ये मां लक्ष्मी के प्रिय भोग में से एक हैं। दिवाली की पूजा में इनका विशेष महत्व होता है और इन्हें घर लाने से धन-समृद्धि बनी रहती है।

9. शंख:
हिन्दू धर्म में शंख को सुख, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। धनतेरस के दिन शंख खरीदने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं।

10. कुबेर यंत्र

ज्योतिषाचार्या के अनुसार, धनतेरस पर कुबेर यंत्र खरीदना शुभ माना जाता है। कुबेर यंत्र की पूजा करने के बाद इसे अपने घर, दुकान के गल्ले या तिजोरी में स्थापित करना चाहिए। इसके बाद 108 बार कुबेर मंत्र का जप करना चाहिए। 

मंत्र इस प्रकार है- ‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥’


धनतेरस के दिन खरीदारी के साथ-साथ यमदीप जलाने की भी परंपरा है। इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है, जिसे यमदीप कहा जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि राजा हेम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। उनकी पत्नी ने उस दिन पूरे कमरे में दीपक जलाए और अपने आभूषणों का ढेर द्वार पर लगा दिया। जब यमराज सर्प के रूप में आए, तो दीपकों की चमक और आभूषणों की चकाचौंध से उनकी आंखें चौंधिया गईं और वे अंदर प्रवेश नहीं कर सके। इस प्रकार राजकुमार के प्राण बच गए। तभी से अकाल मृत्यु से बचने के लिए धनतेरस की शाम को यमदीप जलाने की परंपरा है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। tv10india एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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