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भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ का महाप्रस्थान: 89 की उम्र में धर्मेंद्र का निधन, पवन हंस श्मशान घाट पर पंचतत्व में विलीन

मुंबई: भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर के सबसे चमकते सितारे और बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ कहे जाने वाले दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र (Dharmendra) अब हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने आज अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से न केवल बॉलीवुड बल्कि पूरा देश शोक की लहर में डूब गया है। मुंबई के विले पार्ले स्थित पवन हंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके परिवार, दोस्तों और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

अस्पताल से घर तक का आखिरी सफर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्हें सांस लेने में तकलीफ के चलते ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, 12 नवंबर को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था और वे घर पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे, लेकिन 24 नवंबर की सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

अंतिम संस्कार में उमड़ा बॉलीवुड
धर्मेंद्र के अंतिम दर्शन के लिए उनके जुहू स्थित आवास पर सितारों का तांता लग गया। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा पवन हंस श्मशान घाट के लिए निकली। अंतिम संस्कार के दौरान उनके दोनों बेटे सनी देओल और बॉबी देओल बेहद भावुक नजर आए। पत्नी हेमा मालिनी और बेटी ईशा देओल भी गहरे सदमे में दिखीं।

इस दुखद घड़ी में देओल परिवार को ढांढस बंधाने के लिए अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान और संजय दत्त समेत कई बड़े सितारे श्मशान घाट पहुंचे। ‘शोले’ के ‘जय’ (अमिताभ बच्चन) ने अपने ‘वीरू’ को भारी मन से अंतिम विदाई दी, जो वहां मौजूद हर शख्स के लिए एक भावुक पल था।

पीएम मोदी ने जताया शोक: ‘एक युग का अंत’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा, “धर्मेंद्र जी का जाना भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत है। वे न केवल एक बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि एक नेक दिल इंसान भी थे। उनकी सादगी और अभिनय की गहराई हमेशा याद की जाएगी।” इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

सुनहरा सफर: ‘शोले’ से ‘रॉकी और रानी’ तक
पंजाब के एक छोटे से गांव से निकलकर मुंबई में ‘ही-मैन’ बनने तक का धर्मेंद्र का सफर किसी फिल्म से कम नहीं था। 1960 में फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र ने ‘शोले’, ‘चुपke चुपके’, ‘सीता और गीता’, ‘सत्यकाम’ और ‘धर्मवीर’ जैसी कालजयी फिल्में दीं। हाल ही में वे फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ और ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में नजर आए थे, जहां उनकी मुस्कान ने एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया था।

उनका जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। धर्मेंद्र अपनी फिल्मों और अपने जिंदादिल अंदाज के जरिए हमेशा अपने करोड़ों चाहने वालों के दिलों में जिंदा रहेंगे।

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