राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस: जनपद के 6 लाख से अधिक बच्चों को स्वस्थ बनाने का लक्ष्य, 14 मई को होगा मॉप-अप राउंड

रुद्रपुर। जनपद को कुपोषण मुक्त और स्वस्थ बनाने की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने गांधी कॉलोनी स्थित राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर ‘राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस’ का विधिवत शुभारंभ किया।
मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी
समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पेट के कीड़ों से मुक्ति अनिवार्य है। उन्होंने आगाह किया कि कृमि संक्रमण से बच्चों में न केवल खून की कमी (एनीमिया) होती है, बल्कि उनकी सीखने और समझने की क्षमता भी प्रभावित होती है। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग को समन्वय के साथ जनपद के शत-प्रतिशत बच्चों को दवा कवर करने के निर्देश दिए।
स्वच्छता की दिलाई शपथ
अभियान के दौरान जिलाधिकारी ने बच्चों के साथ संवाद किया और उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बच्चों को भोजन से पूर्व हाथ धोने और खुले में शौच न करने जैसी स्वस्थ आदतों को अपनाने की शपथ दिलाई। उन्होंने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है।
अभियान पर एक नजर:
कुल लक्ष्य: 1 से 19 वर्ष तक के 6,03,960 बच्चे।
कवरेज: समस्त सरकारी, निजी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र।
छूटे हुए बच्चों के लिए: 14 मई को आयोजित होगा मॉप-अप डे।
अनुपस्थित बच्चों को मिलेगा दूसरा मौका
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि जो बच्चे आज किसी कारणवश दवा का सेवन नहीं कर पाए हैं, उन्हें 14 मई को ‘मॉप-अप डे’ के अवसर पर दवा खिलाई जाएगी। इस दौरान मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी सावेद आलम, डीपीएम हिमांशु मुस्यूनी सहित आरबीएसके टीम के सदस्य और विद्यालय का स्टाफ मौजूद रहा।
इनसेट: क्यों जरूरी है कृमि मुक्ति?
विशेषज्ञों के अनुसार, पेट में कीड़े होने से शरीर के पोषक तत्व कीड़े सोख लेते हैं, जिससे बच्चा थकान महसूस करता है और उसका वजन नहीं बढ़ता। समय पर दवा देने से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।
