हरिद्वार। उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति, आस्था और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर ‘भगवान विश्वनाथ-मां जगदीशिला’ की 27वीं डोली यात्रा हरिद्वार पहुंच गई है। हरकी पैड़ी के ब्रह्मकुंड पर पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच डोली का भव्य स्वागत किया गया। पूरे विधि-विधान से डोली को मां गंगा में स्नान कराने के बाद यह पवित्र यात्रा देवभूमि के भ्रमण के लिए रवाना हो गई है।
इस बार यह यात्रा एक बेहद खास और सकारात्मक संकल्प लेकर निकली है— ‘हिमालय आरती’ की शुरुआत। जिस तरह मां गंगा की आरती होती है, उसी तरह अब हिमालय पर्वत की भी आरती की जाएगी, ताकि पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचे।
पर्यावरण को बचाने के लिए शुरू होगी ‘हिमालय आरती’
हर साल इस देव डोली यात्रा की अगुवाई करने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री और यात्रा के संस्थापक मंत्री प्रसाद नैथानी ने बताया कि हिमालय सुरक्षित रहेगा, तभी पर्यावरण और यह पूरी दुनिया सुरक्षित रहेगी। इसलिए हिमालय की रक्षा के लिए ‘हिमालय आरती’ का होना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि हिमालय की आरती तैयार कर ली गई है और जल्द ही इस संकल्प को जमीन पर उतारा जाएगा। इसके लिए उन्होंने सरकारों से भी ध्यान देने की अपील की है।
क्या है इस भव्य डोली यात्रा के 4 मुख्य उद्देश्य?
गंगा दशहरा पर विशौन पर्वत पर होगा समापन
भारत माता मंदिर के श्रीमहंत और निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज के सानिध्य में गंगा पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि पूरा उत्तराखंड देवभूमि है और कण-कण में देवताओं का वास है। यह डोली यात्रा अब चारधाम (गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) सहित प्रदेश के कई प्रमुख मंदिरों के दर्शन करेगी।
उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरने के बाद इस 27वीं डोली यात्रा का समापन ‘गंगा दशहरा’ के पावन पर्व पर टिहरी गढ़वाल के 11 गांव हिंदाव स्थित विशौन पर्वत (बाबा विश्वनाथ धाम) में होगा।
खास बात: यह डोली यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के लोगों को उनकी संस्कृति से जोड़े रखने और पहाड़ों में फिर से रौनक लौटाने का एक बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक प्रयास बन चुकी है।
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