मुख्य बिंदु (Highlights):
देहरादून: भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सटीक निशानेबाजी से गौरवान्वित करने वाले और युवाओं के पसंदीदा मार्गदर्शक रहे जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। दिल्ली के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली।
हाल ही में म्यूनिख (जर्मनी) में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप (ISSF World Cup) के दौरान उन्हें सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत हुई थी। भारत लौटने पर दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उनकी स्टेंट सर्जरी भी हुई थी,वह रिकवर हो रहे थे, लेकिन अचानक हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से हुए इस दुखद अंत ने खेल प्रेमियों और पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है।
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही खेल के मैदान में अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दे दिया था। महज 18 वर्ष की उम्र में 1994 के मिलान वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियनशिप (जूनियर सेक्शन) में उन्होंने न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। इसके बाद उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित खेल पुरस्कारों में से एक ‘अर्जुन पुरस्कार’ (1994) और बाद में ‘पद्मश्री’ (1997) से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रमंडल (Commonwealth) और एशियाई खेलों (Asian Games) में जसपाल राणा का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास की स्वर्णिम गाथाओं में से एक है:
निशानेबाजी से संन्यास लेने के बाद भी जसपाल राणा ने खेल से अपना नाता कभी टूटने नहीं दिया। वे भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में सेवाएं दे रहे थे। नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने के लिए तैयार करने में उनका योगदान अतुलनीय था। साल 2024 के पेरिस ओलंपिक में डबल ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली स्टार शूटर मनु भाकर की शानदार सफलता के पीछे भी मुख्य रूप से जसपाल राणा की कोचिंग और कुशल मार्गदर्शन की भूमिका रही। खेल के क्षेत्र में इस योगदान के लिए उन्हें साल 2020 में प्रतिष्ठित ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’ से भी नवाजा गया था।
जसपाल राणा केवल खेल के मैदान तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि एक बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराई। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट से अपनी किस्मत आजमाई थी, हालांकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद साल 2012 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा और पार्टी के एक स्टार प्रचारक के रूप में सार्वजनिक मंचों पर नजर आए।
जसपाल राणा के अचानक निधन पर देश के शीर्ष नेतृत्व और खेल बिरादरी ने गहरा शोक प्रकट किया है:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक संदेश में कहा कि उन्होंने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश को अपार गौरव दिलाया। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा:
“महान खिलाड़ी जसपाल राणा जी के निधन से अत्यंत दुखी हूं। देश के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मान जीतकर और एक कोच के तौर पर युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षित कर उन्होंने निशानेबाजी में भारत की अजेय शक्ति स्थापित करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। राणा जी का निधन देश के लिए अपूर्णीय क्षति है।”
जसपाल राणा भले ही आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन भारतीय खेलों में उनके अद्वितीय रिकॉर्ड, संघर्ष और मार्गदर्शन से उपजे नए चैंपियन आने वाली पीढ़ियों को सदैव देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
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