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Padma Awards 2026: उत्तराखंड के पूर्व CM भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान, ‘भगत दा’ के संघर्षपूर्ण सफर को मिली नई पहचान

उत्तराखंड के पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान सम्मान से नवाजा जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। बता दें कि भगत सिंह कोश्यारी महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रह चुके हैं।

नई दिल्ली/देहरादून:
गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म पुरस्कारों’ की घोषणा की है। इस सूची में उत्तराखंड के कद्दावर नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का नाम प्रमुखता से शामिल है। उन्हें सार्वजनिक मामलों के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए पद्म भूषण से नवाजा जाएगा।

संघर्षों से तपकर निखरा है ‘भगत दा’ का व्यक्तित्व

पिथौरागढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले भगत सिंह कोश्यारी, जिन्हें क्षेत्र में लोग प्यार से ‘भगत दा’ कहते हैं, का जीवन शून्य से शिखर तक पहुंचने की एक प्रेरणादायक कहानी है। एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे कोश्यारी ने अभावों के बीच शिक्षा प्राप्त की।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय महरगाड़ से ली और जूनियर हाईस्कूल के लिए प्रतिदिन 8 किमी पैदल चलकर शामा जाते थे। भारी आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अल्मोड़ा महाविद्यालय से अंग्रेजी में एमए की डिग्री हासिल की।

शिक्षक से राज्यपाल तक का सफर

भगत सिंह कोश्यारी का सार्वजनिक जीवन बहुआयामी रहा है:

  • RSS से जुड़ाव: वर्ष 1966 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आए और अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।
  • शिक्षा के क्षेत्र में योगदान: 1977 में उन्होंने पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की और वर्षों तक वहां अध्यापन कार्य किया।
  • राजनीतिक पारी: छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले कोश्यारी उत्तर प्रदेश में विधान परिषद सदस्य रहे। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वे अंतरिम सरकार में ऊर्जा, सिंचाई और संसदीय कार्य मंत्री बने और फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली।
  • संसदीय अनुभव: वे देश के उन विरले नेताओं में से हैं जिन्होंने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं।
  • महाराष्ट्र के राज्यपाल: उनकी प्रशासनिक क्षमता और समर्पण को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया था।

मेहनत और समर्पण का प्रतिफल

भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिलना उनके दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन, सादगी और जनता के प्रति उनके समर्पण का सम्मान माना जा रहा है। उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों और आम जनता में इस घोषणा के बाद खुशी की लहर है। समर्थकों का कहना है कि यह सम्मान उस संघर्ष का फल है जो ‘भगत दा’ ने पहाड़ों की दुर्गम राहों से लेकर राजभवन तक तय किया है।

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