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अफ्रीका की धरती पर पहली बार G20 का महामंच, पीएम मोदी की अगुवाई में भारत रचेगा नया कूटनीतिक अध्याय

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20वें G-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग के लिए रवाना हो गए हैं। यह ऐतिहासिक आयोजन 22 और 23 नवंबर, 2025 को होगा, और यह पहली बार है कि G-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी किसी अफ्रीकी देश द्वारा की जा रही है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति को भारत के लिए एक नए कूटनीतिक अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की एक प्रमुख आवाज के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।

यह लगातार चौथा G-20 शिखर सम्मेलन है जिसकी मेजबानी ‘ग्लोबल साउथ’ का कोई देश कर रहा है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री मोदी 21 से 23 नवंबर तक जोहान्सबर्ग में रहेंगे। अपनी यात्रा के दौरान, वह G-20 के एजेंडे पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे और तीनों सत्रों में बोलने की उम्मीद है।

अफ्रीका के विकास पर रहेगा जोर

दक्षिण अफ्रीका ने अपनी G-20 अध्यक्षता के लिए “एकजुटता, समानता, स्थिरता” का विषय चुना है। राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने स्पष्ट किया है कि अफ्रीका का विकास एजेंडे में सबसे ऊपर होगा। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसने अपनी G-20 अध्यक्षता (दिसंबर 2022 से नवंबर 2023) के दौरान अफ्रीकी संघ को G-20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।

भारत की भूमिका और द्विपक्षीय बैठकें

2023 में भारत की सफल G-20 अध्यक्षता के बाद, दुनिया की निगाहें इस बात पर हैं कि भारत वैश्विक मुद्दों पर अपनी छाप कैसे छोड़ता है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी सतत विकास, डिजिटल परिवर्तन, जलवायु वित्त और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को रखेंगे।

शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी के कई विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करने की भी उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, वह दक्षिण अफ्रीका द्वारा आयोजित भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) नेताओं की बैठक में भी भाग लेंगे, जिससे इन प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा।

यह शिखर सम्मेलन भारत को न केवल अपनी कूटनीतिक ताकत प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है, बल्कि अफ्रीका और ‘ग्लोबल साउथ’ के अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने का एक मंच भी है।

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