उत्तरकाशी: विश्व प्रसिद्ध और हिमालय की गोद में बसे गंगोत्री नेशनल पार्क (Gangotri National Park) के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं. पार्क प्रशासन ने 30 नवंबर को गरतांग गली और कनखू बैरियर के पास स्थित गेट पर ताला लगाकर इस सीजन की यात्रा का विधिवत समापन किया. अब देश-विदेश के पर्यटक और पर्वतारोही अगले साल 1 अप्रैल से ही पार्क की अद्भुत सुंदरता का दीदार कर सकेंगे.
इस साल 29 हजार से ज्यादा पर्यटकों ने की सैर
गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक हरीश नेगी ने जानकारी दी कि इस वर्ष कुल 29,162 पर्यटकों और पर्वतारोहियों ने पार्क क्षेत्र में भ्रमण किया. पर्यटकों की इस आमद से पार्क प्रशासन को 80,96,750 रुपये (करीब 81 लाख) का राजस्व प्राप्त हुआ है.
इस दौरान पर्यटकों की चहलकदमी मुख्य रूप से गोमुख, तपोवन, केदारताल, रुद्र गैरा, सुंदर वन, नंदन वन, वासुकी ताल, भैंरो घाटी, नेलांग, गरतांग गली और कालिंदी-चौखंबा पास बदरीनाथ ट्रेक पर रही.
आपदा का दिखा असर, पिछले साल से कम रही आमद
आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल पर्यटकों की संख्या और राजस्व में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है. इसका मुख्य कारण ‘धराली आपदा’ को माना जा रहा है, जिसने यात्रा को प्रभावित किया.
साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए जन्नत माने जाने वाले इस पार्क में अब सन्नाटा पसरा रहेगा. हिमालय की ऊंची चोटियों और बर्फ से ढके नजारों को देखने के लिए पर्यटकों को अब पांच महीने का लंबा इंतजार करना होगा. पार्क प्रशासन के अनुसार, 1 अप्रैल को मौसम अनुकूल होने पर गेट दोबारा खोल दिए जाएंगे.
क्यों खास है गंगोत्री नेशनल पार्क?
उत्तरकाशी जिले में स्थित यह पार्क जैव विविधता का खजाना है. 1,553 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला यह पार्क 7,000 मीटर से भी अधिक ऊंचाई तक विस्तृत है.
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