हल्द्वानी: कुमाऊं के सबसे बड़े नगर निगम हल्द्वानी को वर्षों पुरानी कूड़े की समस्या से जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। गौलापार स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में लंबे समय से जमा लगभग 1.75 लाख मीट्रिक टन पुराने (लेगेसी) कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए नगर निगम ने 9 करोड़ रुपये की योजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत एक नया लेगेसी प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिससे ट्रेंचिंग ग्राउंड में जमा कचरे के ढेरों को हटाया जा सके।
गौलापार ट्रेंचिंग ग्राउंड में वर्षों से जमा कूड़ा स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी परेशानी बना हुआ था। इस वर्ष जनवरी में पुराना अनुबंध समाप्त होने के बाद प्लांट का संचालन पूरी तरह बंद हो गया था। इसके कारण ट्रेंचिंग ग्राउंड में दोबारा कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए थे, जिससे आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगी थी। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, अब इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर संबंधित कंपनी का चयन कर लिया गया है।
नगर निगम ने पुराने जमा कचरे के साथ-साथ शहर से रोजाना निकलने वाले कचरे के प्रबंधन के लिए भी अलग से तैयारी की है। हल्द्वानी शहर से प्रतिदिन लगभग 220 मीट्रिक टन ताजा कचरा निकलता है। इसके त्वरित और वैज्ञानिक प्रसंस्करण (processing) के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड में अलग से आधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं।
इस संबंध में जानकारी देते हुए नगर आयुक्त परितोष वर्मा ने बताया:
“साल 2018 से पहले जमा हुए पुराने कूड़े को व्यवस्थित तरीके से हटाने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की गई है, जिस पर जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, रोजाना आने वाले नए कचरे के तत्काल वैज्ञानिक निस्तारण की भी अलग से व्यवस्था की जा रही है।”
कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए नगर निगम ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गीले कचरे के बेहतर निस्तारण के लिए नगर निगम ने कानपुर की एक प्रतिष्ठित फर्टिलाइजर कंपनी के साथ समझौता (MoU) किया है। इस साझेदारी के तहत शहर के गीले कचरे का उपयोग कर जैविक कंपोस्ट खाद तैयार की जाएगी।
नगर निगम प्रशासन को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था के सुचारू रूप से लागू होने के बाद न केवल हल्द्वानी शहर, बल्कि आसपास के शहरी निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी कूड़े तथा दुर्गंध की समस्या से स्थायी राहत मिल सकेगी।
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