हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए धामी सरकार ने कमर कस ली है। मेले के सफल संचालन के केंद्र बिंदु यानी ‘मेला नियंत्रण भवन’ (CCR) के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत पुरानी बिल्डिंग के पास ही एक नई अत्याधुनिक इमारत (CCR-2) खड़ी की जाएगी, जो सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी।
मेला नियंत्रण भवन का विस्तार केवल ईंट-पत्थरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे तकनीक के मामले में दुनिया के बेहतरीन केंद्रों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है:
हरिद्वार में हर 12 साल में कुंभ और 6 साल में अर्धकुंभ के साथ-साथ वार्षिक कांवड़ मेले का आयोजन होता है। साल 2000 तक उत्तर प्रदेश का हिस्सा रहे हरिद्वार में तब तक कोई स्थाई कंट्रोल रूम नहीं था। राज्य गठन के बाद 2004 में तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार ने हर की पैड़ी के पास पहला आधुनिक मेला नियंत्रण भवन बनवाया था। अब दो दशकों बाद इसकी क्षमताओं को बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
कुंभ की तैयारियों के साथ-साथ स्थानीय बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जा रहा है। खड़खड़ी श्मशान घाट मार्ग पर स्थित सूखी नदी पर अब 13.21 करोड़ रुपये की लागत से 44.80 मीटर लंबा डबल लेन पुल बनाया जाएगा।
प्रशासन के मुताबिक, मेला नियंत्रण भवन में रंगाई-पुताई और फर्नीचर का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही नई इमारत का निर्माण कार्य भी गति पकड़ेगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2027 के महाकुंभ से पहले सभी बुनियादी ढांचे पूरी तरह तैयार हों ताकि दुनिया भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके।
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