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हिमालय में ‘बर्फ का सूखा’: 50 साल का रिकॉर्ड टूटा, कश्मीर से हिमाचल तक पहाड़ वीरान; 2025 बन सकता है सदी का सबसे सूखा साल

देहरादून:सर्दियों का मौसम अपने चरम पर है, लेकिन हिमालय की चोटियां, जो इस समय बर्फ की सफेद चादर से ढकी होनी चाहिए थीं, वे सूखी और वीरान पड़ी हैं। वैज्ञानिकों ने इस स्थिति को ‘बर्फ का सूखा’ (Snow Drought) नाम दिया है। जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के प्रभाव के कारण हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।

आंकड़े दे रहे खतरे की गवाही
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और सैटेलाइट डेटा से प्राप्त आंकड़े एक डरावनी तस्वीर पेश करते हैं:

  • हिमालय रेंज: पिछले चार सालों में यहाँ बर्फबारी में 23% की कमी आई है।
  • कश्मीर: यहाँ बर्फबारी में 46.63% की गिरावट दर्ज की गई है, जिसने 1974 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है
  • बारिश का अभाव: 1 नवंबर से 10 दिसंबर 2025 के बीच हिमाचल प्रदेश में 90%, जबकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लगभग 86% कम बारिश हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया, तो 2025 इस सदी का सबसे सूखा साल साबित हो सकता है।

क्यों नहीं गिर रही बर्फ?
वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके पीछे मुख्य वजह ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) और अल नीनो (El Niño) का प्रभाव है। बढ़ते तापमान के कारण बर्फ न केवल कम गिर रही है, बल्कि जो गिरती है वह भी जल्दी पिघल जाती है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कमजोर होने के कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत के पहाड़ों में गंभीर सूखा पड़ा है।

जल संकट और नदियों पर असर
बर्फ की कमी का सीधा असर एशिया की सबसे महत्वपूर्ण जल प्रणालियों पर पड़ रहा है। सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और झेलम नदी घाटियों में बर्फ की परत (Snow Cover) में भारी गिरावट आई है।

  • झेलम समेत कई नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।
  • ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, लेकिन नई बर्फबारी न होने से उनकी भरपाई (Recharge) नहीं हो पा रही है।
  • सूखे के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है।

पर्यटन और खेती की कमर टूटी
बर्फ के अभाव में स्थानीय अर्थव्यवस्था के दो मुख्य स्तंभ—पर्यटन और कृषि—बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

  1. पर्यटन: गुलमर्ग, सोनमर्ग और अन्य हिल स्टेशन बिना बर्फ के सूने हैं। पर्यटकों की संख्या घट गई है और स्कीइंग या ‘खेलो इंडिया’ जैसे विंटर गेम्स का आयोजन मुश्किल हो गया है।
  2. खेती: सेब और अन्य फलों के बागानों के लिए मिट्टी में नमी बेहद जरूरी है, जो बर्फ के पिघलने से मिलती है। सूखी ठंड फसलों को नुकसान पहुंचा रही है।

विशेषज्ञों की चेतावनी
IMD कश्मीर के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा, “पिछले 4-5 सालों से सर्दियों में बारिश और बर्फबारी लगातार कम हो रही है। आने वाले दिनों में भी किसी बड़ी राहत का पूर्वानुमान नहीं है। अगर ग्लेशियरों की भरपाई नहीं हुई, तो भविष्य में पीने के पानी, हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर और खेती के लिए गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।”

हिमालय दुनिया के औसत तापमान से ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है। यह न केवल पहाड़ों पर रहने वालों के लिए, बल्कि मैदानी इलाकों में नदियों पर निर्भर करोड़ों लोगों के लिए खतरे की घंटी है।

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