चंपावत: उत्तराखंड के चंपावत जिले में मनाई जाने वाली होली अपने आप में अनोखी है। यहाँ की होली न सिर्फ रंगों का त्यौहार है, बल्कि यह चंद राजवंश के इतिहास और संस्कृति का भी प्रतीक है। चंपावत की होली की शुरुआत 15वीं शताब्दी में हुई थी, जब चंद राजाओं ने इसे लोकप्रिय बनाया। उनकी आरंभिक राजधानी चंपावत में होली का विशेष प्रचार-प्रसार किया गया था।
चंपावत की होली में ब्रज की होली की झलक भी मिलती है। इतिहास के अनुसार, चंद राजाओं के दरबार में ब्रज से आए 14 लोगों ने यहाँ ब्रज की होली का गायन किया था। इसके बाद से चंपावत में मनाई जाने वाली होली में ब्रज की होली के गीतों का समावेश होने लगा। चंपावत का चौबे समाज, जो स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण के वंशज मानता है, ब्रज की होली को यहाँ लेकर आया था।
खड़ी होली के रूप में मनाई जाने वाली चंपावत की होली बेहद खास है। यह होली ज्यादातर मंदिर परिसर से शुरू होती है, जहाँ होल्यार पारंपरिक कुमाऊनी वेशभूषा में सज-धज कर आते हैं और हुड़के और ढोल की थाप पर नृत्य करते हुए कुमाऊंनी लोक गथाओं को गाते हैं। इस तरह से चंपावत की होली उत्तराखंड की संस्कृति और इतिहास को जीवंत रखती है.
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