काशीपुर (उधम सिंह नगर)। उत्तराखंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक ‘चैती मेला’ एक बार फिर अपनी पूरी भव्यता के साथ शुरू हो गया है। काशीपुर की मां बाल सुंदरी देवी मंदिर परिसर में लगने वाला यह मेला न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने प्रसिद्ध ‘नखासा बाजार’ (घोड़ा बाजार) के लिए पूरे उत्तर भारत में जाना जाता है। इस वर्ष मेले का मुख्य आकर्षण 10 लाख रुपये की कीमत वाला एक शानदार घोड़ा है।
मेले के नखासा बाजार में देशभर से व्यापारी अपनी बेहतरीन नस्लों के घोड़े लेकर पहुंचे हैं। इस बार बाजार में सिंधी, अरबी, मारवाड़ी, काठियावाड़ी, पंजाबी और अफगानी नस्लों के घोड़ों का जमावड़ा लगा है।
चैती मेले के घोड़ा बाजार का इतिहास करीब 140 साल पुराना है। स्थानीय मान्यताओं और किंवदंतियों के अनुसार, एक दौर में यह मेला कुख्यात डाकुओं की पसंदीदा जगह हुआ करता था।
भले ही आज भी परंपरा जारी है, लेकिन बदलते दौर का असर बाजार पर दिख रहा है। व्यापारियों का कहना है कि पहले की तुलना में अब खरीदारों की संख्या और घोड़ों की विविध नस्लों में कमी आई है। 19 मार्च से शुरू हुए इस मेले में इस बार बाजार थोड़ा शांत है, फिर भी शौकीनों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
चैत्र मास की नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाला यह 15 दिवसीय मेला धर्म, इतिहास और व्यापार का एक दुर्लभ मिश्रण है। जहां श्रद्धालु मां बाल सुंदरी के दरबार में मत्था टेकने आते हैं, वहीं नखासा बाजार मेले को एक अलग रोमांचक पहचान देता है।
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