UTTARAKHAND

केदारनाथ यात्रा होगी सुगम: ७ किलोमीटर लंबी सुरंग से पैदल मार्ग होगा केवल ५ किलोमीटर, श्रद्धालुओं के बचेंगे ७ घंटे

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने केदारनाथ धाम की यात्रा को और भी सुगम, सुरक्षित और छोटा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने चौमासी से लिंचोली तक ७ किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने पर, गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक का १६ किलोमीटर का पैदल रास्ता घटकर केवल ५ किलोमीटर का रह जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं के लगभग ७ घंटे बचेंगे।

यह सुरंग उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में कालीमठ घाटी के अंतिम गांव चौमासी से शुरू होकर लिंचोली तक बनाई जाएगी।वर्तमान में, श्रद्धालुओं को गौरीकुंड से रामबाड़ा (९ किमी), रामबाड़ा से लिंचोली (२ किमी) और फिर लिंचोली से केदारनाथ मंदिर (५ किमी) तक कुल १६ किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है।इस पूरे रास्ते में मंदाकिनी नदी के किनारे होने के कारण भूस्खलन का खतरा बना रहता है, खासकर बारिश के मौसम में।

नई योजना के अनुसार, यात्री वाहनों से रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुंड, चुन्नी बैंड, कालीमठ और कोटमा होते हुए चौमासी तक पहुंच सकेंगे, जहां तक पक्की सड़क पहले से मौजूद है।इसके बाद, ७ किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए श्रद्धालु सीधे लिंचोली पहुंच जाएंगे और वहां से केवल ५ किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।

इस परियोजना के लिए मंत्रालय ने एक कंसल्टेंट के माध्यम से प्रारंभिक सर्वेक्षण भी करा लिया है।[2] सर्वेक्षण करने वाली टीम ने बताया है कि यह मार्ग भूस्खलन की दृष्टि से सुरक्षित है और यहां कठोर चट्टानें हैं, जिससे सुरंग निर्माण में कोई बड़ी बाधा आने की आशंका नहीं है।[2][5] पहले रामबाड़ा से सुरंग बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन उस इलाके को कमजोर पाए जाने के बाद चौमासी से लिंचोली तक के विकल्प को चुना गया।[2]

यह परियोजना अगले ४-५ वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद केदारनाथ पहुंचने के लिए दो रास्ते उपलब्ध होंगे। एक मौजूदा १६ किलोमीटर का पैदल मार्ग और दूसरा यह नया, छोटा और सुरक्षित सुरंग मार्ग, जो हर मौसम में खुला रह सकेगा।इस परियोजना का उद्देश्य २०१३ और २०२४ की त्रासदियों से सबक लेते हुए श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और हर मौसम में चलने योग्य वैकल्पिक मार्ग प्रदान करना है।

इसके अलावा, केदारनाथ यात्रा को और भी सुविधाजनक बनाने के लिए एक रोपवे परियोजना पर भी काम चल रहा है।साथ ही, रुद्रप्रयाग और बद्रीनाथ हाईवे को जोड़ने के लिए भी एक सुरंग का निर्माण किया जा रहा है, जिससे चारधाम यात्रा और भी सुगम हो जाएगी।

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