
रुद्रप्रयाग. उत्तराखंड में चल रही विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस बार आस्था, उत्साह और बेहतरीन व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम बनी हुई है। मौसम की चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। अब तक लगभग 5 लाख (4,97,526) श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। इस बार यात्रा की सबसे खूबसूरत और राहत देने वाली बात केदारनाथ धाम में शुरू की गई एक नई पहल है, जो हिमालय की कठिन चढ़ाई में शिवभक्तों के लिए ‘संजीवनी’ का काम कर रही है।
11,000 फीट की ऊंचाई पर ‘योग और प्राणायाम’ बना संजीवनी
केदारनाथ धाम समुद्र तल से 3000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है, जहां अक्सर ऑक्सीजन की कमी, कड़ाके की ठंड और थकान से यात्रियों को सिरदर्द या सांस लेने में तकलीफ होती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने एक बेहद शानदार पहल करते हुए धाम में निशुल्क ‘योग एवं प्राणायाम शिविर’ शुरू किया है।
- कैसे मिल रहा फायदा: रोजाना सुबह 10 से 11 बजे के बीच केदारनाथ मंदिर के पीछे अनुभवी योग प्रशिक्षक यात्रियों को योगाभ्यास करा रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं का स्वास्थ्य संतुलित हो रहा है और उनकी यात्रा सुरक्षित व आरामदायक बन रही है।
टूट रहे रिकॉर्ड, बाबा केदार के दर पर पहुंचे सबसे ज्यादा भक्त
चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या हर दिन नया रिकॉर्ड बना रही है। 30 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार:
- केदारनाथ धाम: सबसे अधिक 2,44,642 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार का आशीर्वाद लिया है।
- बदरीनाथ धाम: 1,08,165 श्रद्धालु बदरी विशाल के दर्शन कर चुके हैं।
- गंगोत्री और यमुनोत्री: दोनों धामों में अब तक कुल 1,44,719 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।
खराब मौसम भी नहीं डिगा पाया आस्था, प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और कोहरे के बावजूद यात्रा एकदम सुरक्षित और सुचारू रूप से चल रही है।
- डीएम का ग्राउंड एक्शन: रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा खुद ‘ग्राउंड जीरो’ (सोनप्रयाग से हाईवे तक) पर उतरकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। लापरवाही के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है।
- यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान: बारिश और ठंड से बचाने के लिए प्रशासन ने जगह-जगह रेन शेल्टर, पीने के लिए गर्म पानी और बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई हैं।
- सुरक्षा सर्वोपरि: हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन पूरी तरह से मौसम की अनुकूलता देखकर किया जा रहा है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
