पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर है। लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2026 में लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत-चीन पारंपरिक व्यापार फिर से शुरू होने जा रहा है। विदेश मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने इसकी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
जिलाधिकारी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में विभिन्न विभागों के साथ व्यापार सत्र की कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यापार केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सीमांत निवासियों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की धुरी है।
जून से सितंबर तक चलेगा व्यापार
बैठक में जानकारी दी गई कि समझौते के तहत व्यापार का मुख्य सत्र जून से सितंबर तक निर्धारित है। हालांकि, जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि यदि मौसम अनुकूल रहता है, तो व्यापार की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाए, ताकि अधिक से अधिक व्यापारी इसका लाभ उठा सकें।
बढ़ेगी व्यापारियों की संख्या, जारी होंगे ट्रेड पास
इस वर्ष व्यापारियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। पिछले सत्र में 265 व्यापारियों को ट्रेड पास जारी किए गए थे, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़ने की प्रबल संभावना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और योग्य व्यापारियों को प्राथमिकता के आधार पर पास दिए जाएंगे।
व्यापार के मुख्य आकर्षण (आयात-निर्यात)
लिपुलेख के रास्ते होने वाला यह व्यापार सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है:
तैयारियों पर प्रशासन का जोर
अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगी मजबूती
लिपुलेख व्यापार के बहाल होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और सीमांत क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं ताकि 2026 का व्यापार सत्र पूरी तरह सफल और सुगम हो सके।
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