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केदारघाटी में दहशत: मंदाकिनी का अचानक बदला रंग और बढ़ा जलस्तर, निर्माण कार्यों की लापरवाही ने खड़ा किया बड़ा खतरा

न्यूज हाइलाइट्स:

  • समय: मंगलवार सुबह 7:30 बजे।
  • कारण: कुंड बैराज के गेट खोलना और नदी किनारे डंप किया गया अवैध मलबा।
  • प्रभाव: मंदाकिनी नदी का पानी मटमैला हुआ, जलस्तर बढ़ा।
  • आरोप: एनएच विभाग ने नियमों को दरकिनार कर नदी किनारे फेंका सड़कों का मलबा।
  • चेतावनी: विशेषज्ञ बोले—बरसात में यह मलबा बन सकता है बड़ी आपदा का कारण।

रुद्रप्रयाग: केदारघाटी में मंगलवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब मंदाकिनी नदी का पानी अचानक गहरा मटमैला हो गया। नदी के रौद्र रूप और मलबे से भरे पानी को देखकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोग दहशत में आ गए। स्थानीय निवासियों को अंदेशा हुआ कि कहीं केदारनाथ के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश या बादल फटने जैसी घटना तो नहीं हुई है, जिससे 2013 जैसी आपदा की स्थिति बन रही हो।

कुंड बैराज के गेट खुलते ही बिगड़े हालात

जांच करने पर पता चला कि यह घबराहट प्राकृतिक आपदा के कारण नहीं, बल्कि मानवीय हस्तक्षेप के कारण पैदा हुई थी। मंगलवार सुबह करीब साढ़े सात बजे सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना के अंतर्गत कुंड बैराज के सभी गेट एक साथ खोल दिए गए। हालांकि, प्रशासन ने इसके लिए पूर्व सूचना जारी की थी, लेकिन गेट खुलते ही नदी का जलस्तर और प्रवाह इतनी तेजी से बढ़ा कि लोग सहम गए।

नियमों की धज्जियां: नदी में बह रहा हाईवे का मलबा

इस घटना ने केदारनाथ हाईवे और अन्य लिंक मार्गों के निर्माण में बरती जा रही गंभीर लापरवाही की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों और जांच में यह बात सामने आई है कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग और निर्माण एजेंसियां नियमों को ताक पर रखकर सड़कों का भारी मलबा (Debris) निर्धारित डंपिंग जोन के बजाय सीधे नदी के किनारों पर डाल रही हैं।

जैसे ही बैराज के गेट खुले, पानी के तेज बहाव ने किनारों पर जमा भारी मलबे को अपनी चपेट में ले लिया। इसी मलबे के कारण मंदाकिनी का रंग अचानक मटमैला हो गया और हालात भयावह नजर आने लगे।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने दी बड़ी चेतावनी

पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र बद्री ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा:

“कुंड बैराज के गेट खुलने के बाद मंदाकिनी नदी को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई असंभव है। नदियों में इस तरह मलबा डालना जलीय जीव-जंतुओं और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मौत के वारंट जैसा है। यदि समय रहते डंपिंग जोन के मलबे को सुरक्षित नहीं किया गया, तो बरसाती सीजन में यह मलबा बड़ी तबाही का कारण बनेगा।”

स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

केदारघाटी के निवासियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि सरकारी विभागों की अनदेखी भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी को न्यौता दे रही है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  1. नदी किनारे मलबा फेंकने वाली कंपनियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।
  2. डंपिंग जोन के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो।
  3. भविष्य में बैराज के गेट खोलने से पहले सुरक्षा के और पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण के बीच के संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की चुप्पी और कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी केदारघाटी के लिए आने वाले मानसून में बड़ा खतरा बन सकती है।

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