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पहाड़ में दौड़ेगी रेल: 2028 तक ब्यासी पहुंचेगी ट्रेन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट का काम अंतिम दौर में

27 August 2026

AI News Reader

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पहाड़ में दौड़ेगी रेल: 2028 तक ब्यासी पहुंचेगी ट्रेन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट का काम अंतिम दौर में

ऋषिकेश: उत्तराखंड के विकास को नई रफ्तार देने वाला ड्रीम प्रोजेक्ट ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम और सबसे तेज दौर में पहुंच गया है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के नेतृत्व में पहाड़ का सीना चीरकर बनाई जा रही सुरंगों का काम रिकॉर्ड गति से आगे बढ़ रहा है।

परियोजना के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (सिविल) हिमांशु बड़ोनी ने बताया कि प्रोजेक्ट को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर काम चल रहा है। सुरंगों की खुदाई के साथ-साथ फाइनल लाइनिंग, ट्रैक बिछाने, इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग और स्टेशन भवनों के निर्माण का काम समानांतर (Parallel) तरीके से किया जा रहा है।


6 घंटे की थकान भरी दूरी महज 2 घंटे में सिमटेगी

इस 125 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क के शुरू होते ही पहाड़ी रास्तों की कठिन और थकाऊ यात्रा इतिहास बन जाएगी।

  • कर्णप्रयाग: सड़क मार्ग से अभी 6 घंटे का समय लगता है, जो ट्रेन से घटकर महज 2 घंटे रह जाएगा।
  • रुद्रप्रयाग: ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग की दूरी मात्र 1.5 घंटे में तय होगी।
  • चारधाम यात्री: बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं का यात्रा समय कई घंटे कम हो जाएगा।

सुरक्षा के विश्वस्तरीय इंतजाम: 13 एस्केप टनल भी तैयार

परियोजना में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

  • पूरे रूट पर 16 मुख्य सुरंगें और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 13 एस्केप सुरंगें बनाई जा रही हैं।
  • किसी भी तकनीकी खराबी या इमरजेंसी की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार वेंटिलेशन और सुरक्षा उपकरण लगाए जा रहे हैं।

2028 तक ब्यासी सेक्शन तक ट्रेन दौड़ाने का लक्ष्य

RVNL के अनुसार, साल 2028 तक ब्यासी सेक्शन तक ट्रेनों का कमर्शियल संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद पूरी परियोजना को चालू कर उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल को सीधे देश के आधुनिक ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा।

अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए गेमचेंजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत ‘योग नगरी ऋषिकेश’ रेलवे स्टेशन से हो चुकी है। यह रेल नेटवर्क न केवल चारधाम यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, होमस्टे, होटल कारोबार और एडवेंचर टूरिज्म को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

"अधिकारी का बयान:“प्रोजेक्ट का काम तय शेड्यूल के अनुसार पूरी रफ्तार से चल रहा है। समय बचाने के लिए खुदाई, ट्रैक लिंकिंग और स्टेशन निर्माण एक साथ किए जा रहे हैं ताकि देश-विदेश से आने वाले चारधाम यात्रियों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।”— हिमांशु बड़ोनी, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (सिविल), RVNL
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