
हरिद्वार | पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। शोध में यह सिद्ध हुआ है कि रसोई का अहम हिस्सा ‘दालचीनी’ मधुमेह (डायबिटीज) को नियंत्रित करने में रामबाण साबित हो सकती है। खास बात यह है कि इस रिसर्च को अमेरिका के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘एल्सवियर’ (Elsevier) के ‘फूड रिसर्च इंटरनेशनल’ ने स्वीकार करते हुए प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
खबर के मुख्य बिंदु:
- प्राचीन ग्रंथों पर आधारित शोध: वैज्ञानिकों ने आयुर्वेद के ग्रंथों में दालचीनी के उल्लेख को आधार बनाकर आधुनिक लैब में इसका गहन विश्लेषण किया।
- ब्लड शुगर पर सीधा असर: रिसर्च में दालचीनी के जैव सक्रिय तत्वों (Bioactive elements) को रक्त शर्करा (Blood Sugar) कम करने में अत्यधिक प्रभावी पाया गया।
- ग्लोबल पहचान: अंतरराष्ट्रीय जर्नल द्वारा मान्यता मिलने से आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकार्यता और मजबूत हुई है।
- सुरक्षित उपयोग: शोध में दालचीनी के स्वतंत्र उपयोग और अन्य खाद्यान्नों के साथ इसके सुरक्षित वैज्ञानिक पहलुओं का भी विश्लेषण किया गया है।
आचार्य बालकृष्ण का विजन: ‘प्रकृति में ही हर मर्ज का संपूर्ण समाधान’
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने इस उपलब्धि पर कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य मानव जीवन की गंभीर बीमारियों के लिए सुरक्षित और प्राकृतिक समाधान खोजना है। उन्होंने कहा, “दालचीनी पर किया गया यह अध्ययन इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रकृति में स्वास्थ्य का संपूर्ण समाधान छिपा है और आयुर्वेद इसी सत्य को विज्ञान की भाषा में दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।”
वैज्ञानिकों ने परखा दालचीनी का असर
पतंजलि के वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने दालचीनी की ‘जैव उपलब्धता’ (Bio-availability) का विस्तृत अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि दालचीनी न केवल शुगर लेवल को कम करती है, बल्कि यह शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित भी है। इस खोज से आने वाले समय में मधुमेह के उपचार में आयुर्वेद की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
