अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “ऑपरेशन सिंदूर” का जिक्र करते हुए पाकिस्तान पर जोरदार हमला बोला और उसके दोहरे मापदंडों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के बाद मारे गए आतंकवादियों को पाकिस्तान में राजकीय सम्मान दिया गया, उनके ताबूतों पर पाकिस्तानी झंडा लपेटा गया और पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने उन्हें सलामी दी। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि यह साबित करता है कि ये आतंकवादी गतिविधियां केवल छद्म युद्ध (प्रॉक्सी वॉर) नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सोची-समझी युद्धनीति का हिस्सा हैं।
प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद में एक संबोधन के दौरान कहा, “आतंकवादी अब प्रॉक्सी युद्ध नहीं करते। हम इसे प्रॉक्सी युद्ध नहीं कह सकते, क्योंकि 6 मई के बाद मारे गए लोगों को पाकिस्तान में राजकीय सम्मान दिया गया। उनके ताबूतों पर पाकिस्तानी झंडे लपेटे गए और उनकी सेना ने उन्हें सलामी दी।”
‘कांटा निकालना ही होगा’
पीएम मोदी ने कड़े शब्दों में कहा, “यह साबित करता है कि ये आतंकवादी गतिविधियां केवल प्रॉक्सी युद्ध नहीं हैं – यह उनकी ओर से एक जानबूझकर युद्ध की रणनीति है। अगर वे युद्ध में शामिल हैं, तो जवाब उसी के अनुसार होगा।” उन्होंने आगे कहा, “शरीर कितना भी मजबूत या स्वस्थ क्यों न हो, एक कांटा भी लगातार दर्द दे सकता है – और हमने तय किया है कि कांटा निकालना ही होगा।”
प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि पाकिस्तान युद्ध में भारत को कभी नहीं हरा सकता, इसी वजह से उसने प्रॉक्सी युद्ध का सहारा लिया है। उन्होंने कहा, “उन्हें जहां भी मौका मिला, वे हमला करते रहे और हम बर्दाश्त करते रहे। आतंकवादी भारत पर हमले करते रहे और नागरिक हर हमले को बर्दाश्त करते रहे। जब पाकिस्तान के साथ युद्ध की आवश्यकता पड़ी, तो भारत की सैन्य शक्ति ने तीनों बार पाकिस्तान को हराया।”
1947 का जिक्र और कश्मीर मुद्दा
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में 1947 के विभाजन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “1947 में भारत माता के टुकड़े कर दिए गए। देश तीन टुकड़ों में बंट गया और उसी रात कश्मीर की धरती पर पहला आतंकी हमला हुआ। पाकिस्तान ने मुजाहिदीन के नाम पर आतंकियों की मदद से भारत माता के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया। अगर उस दिन ये मुजाहिदीन मार दिए गए होते तो पिछले 75 साल से चल रहा ये सिलसिला देखने को नहीं मिलता।”
प्रधानमंत्री के इस बयान से स्पष्ट है कि भारत, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को लेकर अब अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है और इसे सीधे युद्ध की रणनीति के तौर पर देख रहा है, जिसका जवाब भी उसी के अनुरूप देने का संकल्प व्यक्त किया गया है।
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