
रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत रामनगर के तराई पश्चिमी वन प्रभाग से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहाँ पिछले एक हफ्ते के भीतर बाघों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ताजा मामले में, बैलपड़ाव रेंज के गैबुआ क्षेत्र से एक बीमार बाघिन को रेस्क्यू किया गया है, जो हीट स्ट्रोक और गंभीर डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।
बुधवार देर शाम वन विभाग की टीम को गश्त के दौरान एक बाघिन बेहद कमजोर और घायल अवस्था में दिखाई दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक डॉ. साकेत बडोला के निर्देशन में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बाघिन को ट्रेंक्यूलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया।
चिकित्सकों के अनुसार, रेस्क्यू के समय बाघिन का बॉडी टेम्परेचर 108 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच चुका था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हीट स्ट्रोक की एक अत्यंत खतरनाक स्थिति है। साथ ही बाघिन गंभीर रूप से डिहाइड्रेटेड भी थी।
बाघिन को रेस्क्यू के तुरंत बाद ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया। वर्तमान में उसे ग्लूकोज, ड्रिप और आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां दी जा रही हैं। उसकी स्थिति पर पल-पल की नजर रखी जा रही है और ब्लड टेस्ट के जरिए संक्रमण या अन्य बीमारियों की जांच की जा रही है।
मुख्य वन संरक्षक डॉ. साकेत बडोला ने बताया, “बाघिन का तापमान काफी अधिक था जो हीट स्ट्रोक का स्पष्ट संकेत है। हमारी टीम उसका इलाज कर रही है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।”
एक हफ्ते में तीन बड़ी घटनाएं: क्या खतरे में है राष्ट्रीय पशु?
तराई पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले महज सात दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी घटना है:
- चार दिन पहले: एक बाघ की मौत का मामला सामने आया।
- मंगलवार: आपसी संघर्ष में घायल एक नर बाघ का रेस्क्यू किया गया।
- बुधवार: इस 7 वर्षीय बाघिन का रेस्क्यू किया गया, जो भीषण गर्मी की चपेट में है।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। भीषण गर्मी और बढ़ता तापमान न केवल इंसानों बल्कि जंगलों के राजा ‘बाघ’ के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञ इन मामलों को पारिस्थितिक परिवर्तन और बढ़ते तापमान से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग पूरी मुस्तैदी से बाघिन को बचाने के प्रयास में जुटा है।
