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Good News: अब किराएदार रहेंगे बेफिक्र, मकान मालिक की मनमानी पर लगा ‘Lock’

नए साल 2025 में किराएदारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार के ‘मॉडल टेनेंसी एक्ट’ को आधार बनाकर कई राज्यों ने नए नियम लागू करना शुरू कर दिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब कोई भी मकान मालिक “जब चाहे तब” आपके घर में नहीं घुस सकता और न ही मनमाना किराया बढ़ा सकता है।

किराएदारों को मिले ये 7 बड़े अधिकार (7 Big Rights):

  1. प्राइवेसी का अधिकार (Right to Privacy – No Surprise Visits):
    • नियम: मकान मालिक को आपके कमरे या घर में आने से पहले 24 घंटे का लिखित नोटिस (मैसेज या ईमेल भी मान्य) देना होगा।
    • फायदा: अब मकान मालिक अचानक सुबह-सुबह दरवाजा खटखटाकर “इंस्पेक्शन” के नाम पर आपको परेशान नहीं कर सकेगा। आने का समय भी दिन का (सुबह 7 से शाम 8 बजे के बीच) होना चाहिए।
  2. सिक्योरिटी डिपॉजिट की सीमा (Security Deposit Cap):
    • नियम: रिहायशी मकान (Residential) के लिए मकान मालिक 2 महीने के किराए से ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं मांग सकता।
    • फायदा: पहले जो मकान मालिक 6-10 महीने का एडवांस मांगते थे, अब उस पर रोक लगेगी। आपकी जेब पर बोझ कम होगा।
  3. किराया बढ़ाने का सख्त नियम (Rent Hike Rules):
    • नियम: किराया एग्रीमेंट की अवधि (जो आमतौर पर 11 महीने होती है) के बीच में नहीं बढ़ाया जा सकता। किराया बढ़ाने से 3 महीने पहले नोटिस देना अनिवार्य है।
    • फायदा: अब अचानक “अगले महीने से किराया 2000 बढ़ेगा” जैसा फरमान नहीं सुनाया जा सकता।
  4. बेदखली से सुरक्षा (Protection from Eviction):
    • नियम: मकान मालिक आपको बिना किसी ठोस कानूनी कारण और कोर्ट के आदेश के जबरदस्ती घर से नहीं निकाल सकता। ताला बदलना या सामान बाहर फेंकना गैरकानूनी है।
    • फायदा: आपकी सिर की छत सुरक्षित है। अगर एग्रीमेंट खत्म भी हो गया है, तो भी उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
  5. बुनियादी सुविधाएं काटने पर रोक (Right to Essential Services):
    • नियम: अगर किराए को लेकर कोई विवाद भी हो जाए, तो भी मकान मालिक बिजली, पानी या लिफ्ट जैसी सुविधाएं नहीं काट सकता।
    • फायदा: विवाद सुलझने तक आपको अंधेरे या बिना पानी के रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
  6. रखरखाव की जिम्मेदारी (Right to Maintenance):
    • नियम: मकान की स्ट्रक्चरल मरम्मत (जैसे दीवार में सीलन, पेंट, वायरिंग) की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी। अगर वो ठीक नहीं कराता, तो आप ठीक कराकर किराए से पैसा काट सकते हैं।
    • फायदा: टूटे नल या खराब पंखे के लिए अब आपको मकान मालिक के पीछे भागने की जरूरत नहीं, नियम आपके साथ है।
  7. डिजिटल एग्रीमेंट और कोर्ट (Digital Agreement & Fast Justice):
    • नियम: सभी एग्रीमेंट का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। विवाद होने पर सिविल कोर्ट के चक्कर नहीं काटने होंगे, इसके लिए अलग ‘रेंट अथॉरिटी’ बनेगी जिसे 60 दिनों में फैसला देना होगा।
    • फायदा: वकीलों के चक्कर और सालों का इंतजार खत्म। फैसला जल्दी और निष्पक्ष होगा।
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