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ऋषिकेश में योग का महाकुंभ: परमार्थ निकेतन में जुटे 80 देशों के साधक; योग के मंच पर एक साथ आए रूस-यूक्रेन और इजराइल

ऋषिकेश | तीर्थनगरी ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में ‘अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव’ (International Yoga Festival) का विधिवत शुभारंभ हो गया है। पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में इस भव्य महोत्सव का उद्घाटन हुआ। इस दौरान दुनिया के 80 से अधिक देशों से आए योग साधकों और योगाचार्यों ने विश्व शांति के लिए एक सुर में प्रार्थना की।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने आचार्य बालकृष्ण को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

योग की ताकत: युद्धरत देशों के साधक भी एक मंच पर
महोत्सव में दुनिया भर में चल रहे तनाव के बीच एक अद्भुत तस्वीर देखने को मिली। आचार्य बालकृष्ण ने योग जिज्ञासुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया में हर तरफ अशांति है, लेकिन कोई भी अशांति नहीं चाहता। उन्होंने कहा, “यहां एक साथ ईरान, इजराइल, यूक्रेन और रूस के लोग मौजूद हैं। अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और विचारों के लोग एक मंच पर जुड़े हैं, जो दिलों को जोड़ती है। यही योग की असली शक्ति है।”

आचार्य बालकृष्ण का संदेश: जीवन का सत्य समझना है तो योगी बनें

  • योग और आयुर्वेद का समन्वय: आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए योग और आयुर्वेद की प्राचीन भारतीय परंपरा का संतुलित होना अत्यंत आवश्यक है।
  • शांति का मार्ग: उन्होंने कहा कि अशांति से शांति कभी उत्पन्न नहीं हो सकती। शांति स्थापित करने के लिए ऐसे महोत्सव बहुत महत्वपूर्ण हैं।
  • निरंतर करें योग: जीवन का सत्य समझना है तो योगी बनना होगा। इस जीवन को शुद्ध और पवित्र बनाना हमारे अपने हाथ में है। बिना विचलित हुए योग के मार्ग पर चलते रहें।

गंगा आरती में शिवमणि के ड्रम और ‘ऊं नमः शिवाय’ पर झूमे विदेशी
महोत्सव के पहले दिन गंगा आरती का नजारा बेहद दिव्य और ऊर्जावान रहा। विश्व प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि ने अपनी प्रस्तुति से पूरे वातावरण को ‘ऊं नमः शिवाय’ के मंत्र से गुंजायमान कर दिया। ड्रम की जीवंत ध्वनियों और संगीत पर देश-विदेश से आए योग साधक जमकर झूमे। संगीत, आध्यात्मिक आनंद और योग के इस संगम ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

भारतीय ज्ञान परंपरा से रूबरू हुए विदेशी मेहमान
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण के आगमन से महोत्सव का वातावरण और भी प्रेरणादायक हो गया है। उनके विचारों ने देश-विदेश से आए योग साधकों को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई से परिचित कराया है।

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