
बदरीनाथ/चमोली: भगवान बदरीविशाल के दर्शनों के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद सुखद और सकारात्मक खबर है। आने वाले समय में बदरीनाथ की यात्रा न केवल आत्मिक शांति देगी, बल्कि प्रकृति के एक बेहद खूबसूरत और आध्यात्मिक रूप के दर्शन भी कराएगी। वन विभाग ने बदरीनाथ धाम के ‘आस्था पथ’ पर ‘रुद्राक्ष वन’ विकसित करने की एक शानदार पहल की है।
क्या है वन विभाग की यह खास योजना?
अलकनंदा वन प्रभाग द्वारा इस पावन यात्रा मार्ग को आध्यात्मिक रूप से और भी समृद्ध बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
- 50 हेक्टेयर में फैलेगा रुद्राक्ष वन: योजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर करीब 50 हेक्टेयर भूमि का चयन किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में रुद्राक्ष के पवित्र पौधे रोपे जाएंगे।
- लगेंगे धार्मिक महत्व के पौधे: सिर्फ रुद्राक्ष ही नहीं, बल्कि बदरीनाथ हाईवे और आसपास के धार्मिक मार्गों पर पीपल, बरगद, भोजपत्र, बेलपत्री, आम, देवदार, सुरांई और पदम जैसे पौधे भी लगाए जाएंगे।
तीर्थयात्रियों को मिलेगा तपोवन जैसा अहसास
गढ़वाल के वन संरक्षक आकाश वर्मा ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य आस्था पथ को धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से एक विशेष स्वरूप देना है। इस पर काम शुरू हो चुका है और जब यह योजना पूरी तरह धरातल पर उतरेगी, तो श्रद्धालुओं को पूरे यात्रा मार्ग पर एक सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होगा। यह मार्ग आस्था, संस्कृति और प्रकृति का एक अनोखा केंद्र बन जाएगा।
लौटेगी हाईवे की खोई हुई हरियाली और छांव
यह पहल इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ऋषिकेश से बदरीनाथ तक ‘ऑलवेदर रोड’ के चौड़ीकरण कार्य के दौरान कई पुराने और धार्मिक महत्व के पेड़ नष्ट हो गए थे। पहले श्रद्धालु नंदप्रयाग, बिरही, भीमतला, हेलंग जैसे पड़ावों पर इन्हीं पेड़ों की शीतल छांव में बैठकर अपनी थकान मिटाते थे। वर्तमान में इन पेड़ों की कमी महसूस की जा रही थी।
अब वन विभाग की इस नई मुहिम से न केवल यात्रा मार्ग की वह खोई हुई हरियाली वापस लौटेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में तीर्थयात्रियों को चिलचिलाती धूप में फिर से इन पवित्र पेड़ों की शीतल छांव और सुकून मिलेगा। निश्चित तौर पर यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ तीर्थयात्रियों के सफर को अलौकिक और यादगार बनाएगी।
