रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बदरीनाथ हाईवे पर स्थित नगरासू गुरुद्वारे में शनिवार शाम से चल रहा हाई वोल्टेज ड्रामा रविवार शाम करीब 27 घंटे बाद शांत हो गया है। जिला प्रशासन, पुलिस और निहंगों के बीच तीन दौर की लंबी वार्ता के बाद गतिरोध दूर हुआ। निहंगों ने बंधक बनाए गए सेवादार नवतेज सिंह को पूरी तरह सुरक्षित छोड़ दिया है। वहीं, छत पर चढ़े निहंगों में से एक अकाल सिंह भी नीचे आ गया है, जबकि बचे हुए छह निहंगों से प्रशासन की बातचीत जारी है।
गुरुद्वारे में रविवार शाम से श्रद्धालुओं की आवाजाही के साथ-साथ अरदास और लंगर की व्यवस्थाएं सामान्य रूप से बहाल कर दी गई हैं।
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम गुरुद्वारे में लंगर के दौरान प्रबंध कमेटी और निहंगों के बीच किसी बात को लेकर आपसी मतभेद हो गया था। इसकी सूचना जब पुलिस कंट्रोल रूम को मिली तो पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस को देखकर निहंगों को लगा कि प्रबंध कमेटी ने उन्हें पकड़वाने के लिए पुलिस बुलाई है। इस गलतफहमी के बाद 7 निहंग गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर चढ़ गए।
निहंगों ने गुरुद्वारे के सेवादार नवतेज सिंह समेत दो लोगों को अपने कब्जे में ले लिया था। इनमें से एक व्यक्ति को शनिवार देर रात ही छोड़ दिया गया था, जबकि सेवादार को रविवार शाम को वार्ता के बाद रिहा किया गया। निहंग 16 जून को चमोली के कर्णप्रयाग बाजार में हुए विवाद के मामले में गिरफ्तार किए गए अपने साथियों की रिहाई की मांग पर अड़े थे।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए रुद्रप्रयाग की एसपी नीहारिका तोमर और जिलाधिकारी विशाल मिश्रा खुद मौके पर डटे रहे। एसपी नीहारिका तोमर ने करीब एक घंटे तक फोन पर निहंगों से सीधे बातचीत की। सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए गुरुद्वारा परिसर और आसपास के क्षेत्र में पुलिस, एटीएस (ATS), आईटीबीपी (ITBP) और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों को तैनात किया गया था।
“हम सही सलामत हैं, आपसी मतभेद के कारण मोर्चा लगाया था”“हम पूरी तरह सही सलामत हैं। हम कर्णप्रयाग जाने के लिए नगरासू आए थे। यहां किसी बात को लेकर मतभेद हो गया था, जिसके कारण हमने मोर्चा लगा लिया था। अब हम नीचे उतर आए हैं। पुलिस प्रशासन ने हमारा पूरा सहयोग किया है और अब हम वापस अपने घर जा रहे हैं।”— अकाल सिंह, निहंग (जो नीचे उतर आए हैं)
“यह आपसी विवाद था, जनता या पुलिस से कोई टकराव नहीं”“लंगर के दौरान प्रबंध कमेटी और निहंगों के बीच विवाद हुआ था। पुलिस के पहुंचने पर निहंगों को लगा कि कमेटी ने पुलिस बुलाई है। दोनों बंधकों को सुरक्षित छोड़ दिया गया है। निहंगों की कुछ मांगें हैं, जिन पर शांतिपूर्वक बातचीत चल रही है। इनका विवाद स्थानीय जनता या पुलिस से नहीं है। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक पोस्ट की जांच के निर्देश दिए गए हैं।”— राजीव स्वरूप, आईजी गढ़वाल
“गुरुद्वारे पर कब्जे या हिंसा की बातें पूरी तरह असत्य”“नगरासू गुरुद्वारे में अरदास, लंगर और यात्रियों की आवाजाही सुचारु रूप से जारी है। सभी नागरिकों से अपील है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर ध्यान न दें। गुरुद्वारे में किसी प्रकार के कब्जे, हिंसा या लंबे समय तक बंधक बनाए जाने की बातें पूरी तरह असत्य और अपुष्ट हैं।”— विशाल मिश्रा, जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग
चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के मार्ग पर हुए इस विवादित प्रकरण को लेकर उत्तराखंड सरकार ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। गृह सचिव शैलेश बगोली ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर चेतावनी दी कि इस घटना को सांप्रदायिक रंग देकर प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा।
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