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देहरादून। प्रदेश में गन्ना खेती और चीनी उद्योग को मजबूती देने के लिए पेराई सत्र 2026-27 की गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। राज्य में आगामी 11 मई से गन्ना सर्वे का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा। इस संबंध में शासन और विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्वे कार्य में पारदर्शिता और किसानों की सुविधा सर्वोपरि रहेगी।
लापरवाही पर नपेंगे अधिकारी: मंजीत सिंह
शनिवार को कार्यालय आयुक्त में गन्ना विकास एवं सलाहकार समिति के सह अध्यक्ष मंजीत सिंह ने विभागीय अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि सर्वे प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और किसी भी स्तर पर किसानों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
हर खेत का होगा डिजिटल ब्योरा
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त श्री त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने बताया कि विभाग का लक्ष्य है कि प्रदेश के एक भी किसान का गन्ना क्षेत्र सर्वे से न छूटे। सर्वे के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
गन्ना प्रजाति: किसान किस किस्म का गन्ना उगा रहे हैं, इसका सटीक रिकॉर्ड रखा जाएगा।
अनिवार्य पंजीकरण: प्रत्येक गन्ना किसान के खेत का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन होगा।
किसान सुविधा: सर्वे टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के साथ समन्वय बनाकर डेटा दर्ज करें।
पारदर्शिता के लिए विशेष इंतजाम
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस बार सर्वे में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा सकता है ताकि आंकड़ों में हेराफेरी की गुंजाइश न रहे। बैठक में मौजूद अन्य अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे समय-समय पर क्षेत्रों का भ्रमण कर सर्वे कार्य की निगरानी करें। इस पहल से आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने की उपलब्धता का सही आकलन हो सकेगा, जिससे मिलों के संचालन में आसानी होगी।
वर्जन
“गन्ना सर्वेक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी किसान का क्षेत्र सर्वे से छूटता है, तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारी की जवाबदेही तय होगी।”
— त्रिलोक सिंह मर्तोलिया, आयुक्त गन्ना विकास।
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