UTTARAKHAND

उत्तराखंड में जमीन से पानी निकालना अब होगा महंगा, कैबिनेट ने भूजल शुल्क को दी मंजूरी

देहरादून: कैबिनेट ने राज्य में गैर कृषिकारी (कृषि एवं कृषि संबंधित कार्यों तथा राजकीय पेयजल व्यवस्था को छोड़कर) उपयोग के लिए भूजल के निकास पर जल मूल्य-प्रभार की दरें (जो तत्काल से लागू होगी) लागू किए जाने की मंजूरी दी है।

इसमें सुरक्षित क्षेत्र, अर्द्धगंभीर, गंभीर और अति दोहित क्षेत्र के हिसाब से और उपयोग के अनुसार अलग- अलग दर होगी। पंजीकरण के लिए भी पांच हजार की राशि देनी होगी। कई होटल, वॉटर एमयूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई सेंटर, स्वीमिंग पूल में भूजल का उपयोग किया जाता है।

इसी तरह औद्योगिक इकाइयों के अलावा व्यवसायिक उपयोग के अलावा रेजीडेंशियल अपार्टमेंट, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में भूजल का उपयोग होता है। अब कैबिनेट ने भूजल को निकालने पर जल मूल्य-प्रभार की दरें तय की हैं।

 उत्तराखंड सरकार ने राज्य के भूजल स्तर को संरक्षित करने और इसके अंधाधुंध दोहन को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गैर-कृषिकारी कार्यों के लिए भूजल के निकास पर जल मूल्य-प्रभार (Water Charges) की दरों को लागू करने की मंजूरी दे दी गई है। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

किसे देनी होगी कितनी फीस?

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, राज्य को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटा गया है। भूजल शुल्क की दरें क्षेत्र की स्थिति और पानी के उपयोग के आधार पर तय होंगी:

  1. क्षेत्रों का वर्गीकरण: शुल्क की दरें सुरक्षित क्षेत्र (Safe), अर्द्धगंभीर (Semi-critical), गंभीर (Critical) और अति दोहित (Over-exploited) क्षेत्रों के आधार पर अलग-अलग होंगी। अति दोहित क्षेत्रों में शुल्क सबसे अधिक होगा।
  2. पंजीकरण शुल्क: भूजल निकासी के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, जिसके लिए 5,000 रुपये की राशि देनी होगी।

इन पर पड़ेगा सीधा असर

यह नए शुल्क मुख्य रूप से व्यावसायिक और औद्योगिक इकाइयों पर लागू होंगे। इनमें शामिल हैं:

  • पर्यटन और मनोरंजन: होटल, वॉटर एम्यूजमेंट पार्क, और स्वीमिंग पूल।
  • व्यावसायिक सेवाएँ: वाहन धुलाई (Car Wash) सेंटर।
  • आवासीय इकाइयां: बड़े रेजीडेंशियल अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी।
  • औद्योगिक इकाइयां: सभी प्रकार के उद्योग जो व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भूजल का उपयोग करते हैं।

इन्हें दी गई है छूट

सरकार ने आम जनता और किसानों को राहत देते हुए कुछ क्षेत्रों को इस दायरे से बाहर रखा है:

  • कृषि कार्य: खेती और कृषि से संबंधित कार्यों के लिए भूजल निकालने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा।
  • पेयजल व्यवस्था: राजकीय पेयजल योजनाओं और सरकारी जलापूर्ति व्यवस्था को इस प्रभार से मुक्त रखा गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

राज्य में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण भूजल का स्तर गिर रहा है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य पानी के व्यावसायिक उपयोग को विनियमित करना और लोगों को पानी की बर्बादी के प्रति सचेत करना है। इससे प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग जल संरक्षण की योजनाओं में किया जा सकेगा।

Tv10 India

Recent Posts

कुंभ-2027 की तैयारी: हरिद्वार में अब ‘हेलीपैड’ वाला बनेगा नया कंट्रोल रूम, सुखी नदी पर बनेंगे दो आधुनिक पुल

हरिद्वार। हरिद्वार में 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है।…

5 hours ago

कुंभ-2027: हरिद्वार में 50.27 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी, सीएम धामी ने दिए निर्माण में तेजी के निर्देश

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के समग्र विकास और आगामी कुंभ मेला-2027 की…

5 hours ago

उत्तराखंड: चीन सीमा की ‘नीती घाटी’ में गूँजेगी धावकों की पदचाप, पहली बार होगा अंतरराष्ट्रीय ‘नीती एक्ट्रीम अल्ट्रा रन’

जोशीमठ: उत्तराखंड का पर्यटन विभाग राज्य के सीमांत क्षेत्रों को साहसिक पर्यटन (एडवेंचर टूरिज्म) के…

6 hours ago

उत्तराखंड में कुदरत का कहर: बारिश से दरके पहाड़, बदरीनाथ-गंगोत्री समेत कई हाईवे बंद

सार : तीन दिन की बर्फबारी के बाद हालांकि आज धूप खिली है, लेकिन रास्ते…

24 hours ago

उत्तराखंड के 5 जिलों में हिमस्खलन का अलर्ट: उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में ‘डेंजर लेवल-3’, प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश

राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और हिमस्खलन की आशंका जताई गई है। उत्तरकाशी,…

1 day ago

धामी का ‘मिशन 2027’: मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही साफ हुआ भाजपा का चेहरा, चुनाव से पहले भरी कैबिनेट

देहरादून। चार साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तराखंड की धामी सरकार का मंत्रिमंडल पूरी…

1 day ago