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उत्तराखंड में ‘जनगणना 2027’ का आगाज: पहले चरण का काम शुरू, मकानों की नंबरिंग और मैपिंग में जुटे प्रगणक

देहरादून: उत्तराखंड में भारत की ‘जनगणना 2027’ के महाभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। 25 अप्रैल से प्रदेशभर में जनगणना के पहले चरण— ‘मकान सूचीकरण एवं मकान की गणना’ (House Listing Operations) का कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रगणक (Enumerators) और पर्यवेक्षक घर-घर जाकर डेटा जुटाने में लग गए हैं।

डिजिटल होगी जनगणना: मोबाइल ऐप पर फीड हो रहा डेटा

इस बार की जनगणना आधुनिक और डिजिटल तकनीक पर आधारित है। शुरुआती चरण में प्रगणक मकानों की नंबरिंग और मैपिंग का कार्य कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में प्रगणकों ने मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए डेटा फीडिंग भी शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक परिवार से 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछे जा रहे हैं, जिनके आधार पर राज्य के विकास की आगामी योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

मैदान से लेकर पहाड़ तक सक्रिय हुई टीमें

राज्य के लगभग सभी जिलों में यह अभियान शुरू हो चुका है:

  • अल्मोड़ा: हवालबाग के कंखोला और नगर निगम के लक्ष्मेश्वर वार्ड में टीमों ने घर-घर जाकर सर्वे किया।
  • रुद्रप्रयाग: प्रतापनगर तहसील के सुदूरवर्ती गांव गोदड़ी में भी जनगणना टीम पहुंच चुकी है।
  • ऊधमसिंह नगर: खटीमा तहसील में भी भवनों के चिन्हांकन और गणना का कार्य तेजी से चल रहा है।

हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अभी प्रगणकों को किट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

स्व-गणना (Self-Enumeration) में देहरादून और नैनीताल सबसे आगे

जनगणना कार्य निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के 71,104 परिवारों ने अब तक स्व-गणना (Self-Enumeration) के माध्यम से अपना विवरण दर्ज किया है। जिलों की स्थिति इस प्रकार है:

जिलास्व-गणना करने वाले परिवार
देहरादून12,778
नैनीताल10,253
हरिद्वार8,090
ऊधम सिंह नगर6,588
अल्मोड़ा4,863
बागेश्वर4,552
पिथौरागढ़4,027
पौड़ी3,831
चंपावत3,742
टिहरी3,701
उत्तरकाशी3,414
चमोली3,341
रुद्रप्रयाग1,924

आम जनता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी

जनगणना से जुड़ी किसी भी शंका, मार्गदर्शन या सहायता के लिए सरकार ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 जारी किया है। नागरिक सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच इस नंबर पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

क्या कहती हैं निदेशक?

जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि 25 अप्रैल से काम शुरू हो चुका है। वर्तमान में जिन क्षेत्रों में मकानों की मैपिंग और नंबरिंग पूरी हो चुकी है, वहां डेटा संकलन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने जनता से प्रगणकों का सहयोग करने और सटीक जानकारी देने की अपील की है ताकि राज्य के समग्र विकास के लिए ठोस आंकड़े मिल सकें।


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