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उत्तराखंड: धार्मिक स्थलों का मास्टर प्लान बनाने के आदेश जारी, हरिद्वार हादसे के बाद सीएम धामी ने दिए निर्देश

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में हुई दुखद घटना से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य के सभी महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों का विस्तृत मास्टर प्लान बनाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।इस योजना का मुख्य उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना और करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में हर वर्ष करोड़ों की संख्या में तीर्थयात्री आते हैं और उनकी सुरक्षा तथा सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी तीर्थ स्थलों का मास्टर प्लान बनाया जाएगा, जिसके तहत जनसुविधाएं विकसित कर यात्रा को और अधिक सुव्यवस्थित किया जाएगा।

देहरादून: हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य के सभी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मंगलवार को मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने पर्यटन सचिव को सभी धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए तत्काल मास्टर प्लान बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह कदम 27 जुलाई को मनसा देवी मंदिर में हुई भगदड़ की घटना के बाद उठाया गया है, जिसमें कई श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। घटना के तुरंत बाद सीएम धामी ने घटनास्थल का दौरा किया था और स्थिति का जायजा लिया था।

मास्टर प्लान में क्या होगा खास?

प्रस्तावित मास्टर प्लान में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • भीड़ प्रबंधन और क्षमता का आकलन: प्रत्येक मंदिर की धारण क्षमता का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाएगा और उसी के अनुरूप श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित किया जाएगा।
  • सुगम प्रवेश और निकास: श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए जाएंगे।
  • आपातकालीन योजना: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक प्रभावी आपातकालीन निकासी योजना तैयार की जाएगी।
  • अतिक्रमण हटाना: मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों से सभी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा ताकि रास्ते चौड़े और सुगम हो सकें।
  • बुनियादी सुविधाएं: श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार, पार्किंग और सूचना प्रणाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
  • अनिवार्य पंजीकरण: श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य पंजीकरण की व्यवस्था की जाएगी ताकि भीड़ को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया जा सके।

समितियों का गठन और नोडल अधिकारी नियुक्त

इस मास्टर प्लान को तैयार करने और उसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए गढ़वाल और कुमाऊं, दोनों मंडलों के आयुक्तों की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने के निर्देश दिए गए हैं। इन समितियों में संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। दोनों मंडलायुक्तों को इस कार्य के लिए विशेष सहयोग प्रदान करने के लिए कहा गया है।

सरकार का लक्ष्य इस मास्टर प्लान के जरिए उत्तराखंड आने वाले करोड़ों तीर्थयात्रियों की यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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