देहरादून: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति को और धार देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय (Uttarakhand Ayurved University) पर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। विवि में लंबे समय से चल रही वित्तीय अनियमितताओं और अवैध नियुक्तियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, सीएम धामी ने मामले की ‘विजिलेंस से खुली जांच’ (Open Vigilance Inquiry) कराने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
आयुर्वेद विश्वविद्यालय पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में घिरा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगभग 300 करोड़ रुपये के कथित घोटाले, नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली और खरीद-फरोख्त (procurement) में वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप हैं।
सीएम धामी के निर्देश के मुख्य बिंदु:
क्यों पड़ी खुली जांच की जरूरत?
सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी विभागीय स्तर पर जांच समितियां बनी थीं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन पर जांच में सहयोग न करने और दस्तावेज छिपाने के आरोप लगते रहे। विजिलेंस की शुरुआती रिपोर्ट में भी भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद अब मुख्यमंत्री ने इसे निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने के लिए ‘ओपन इन्क्वायरी’ का ब्रह्मास्त्र चलाया है।
इस फैसले से विवि के कई पूर्व और वर्तमान वरिष्ठ अधिकारियों, कुलपतियों और कुलसचिवों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
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