UTTARAKHAND

गैरसैंण बजट सत्र पर कांग्रेस का तीखा हमला: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार को घेरा, उठाए संसदीय मर्यादाओं पर सवाल

देहरादून: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में संपन्न हुए विधानसभा बजट सत्र के बाद अब प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। रविवार को देहरादून में आयोजित एक प्रेसवार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर लोकतंत्र की हत्या और संसदीय परंपराओं की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है।

संसदीय परंपराओं का उल्लंघन
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार ने बजट सत्र को महज एक औपचारिकता बना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के बाद बजट पेश किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने जल्दबाजी में उसी दिन बजट पेश कर संसदीय नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। आर्य ने कहा, “यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अपमान है।”

सदन में सत्ता पक्ष की उदासीनता पर सवाल
यशपाल आर्य ने बजट चर्चा के दौरान सदन में भाजपा नेताओं की भारी कमी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने खुलासा किया कि जब विभागों के बजट पर चर्चा हो रही थी, तब सदन में सत्ता पक्ष के मात्र 17 विधायक और दो मंत्री ही मौजूद थे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार और उसके विधायक जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति कितने गंभीर हैं।”

सरकारी जमीनों के निजीकरण का गंभीर आरोप
प्रेसवार्ता में एक बड़ा खुलासा करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य की बेशकीमती सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की योजना बना रही है। यशपाल आर्य ने कहा, “विकासनगर, मसूरी और देहरादून की यमुना कॉलोनी स्थित सिंचाई विभाग और सरकारी जमीनों को निजी संस्थाओं को देने की तैयारी है। कांग्रेस इस कदम का पुरजोर विरोध करेगी।”

बढ़ते कर्ज और विफल बजट पर चिंता
राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भी कांग्रेस ने चिंता व्यक्त की। आर्य ने कहा कि सरकार 1.11 लाख करोड़ रुपये के बजट का बखान कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य पर कर्ज का बोझ भी 1.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में आवंटित बजट भी पूरी तरह खर्च नहीं हो पाया, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में सरकार की विफलता साफ झलकती है।

बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों से किनारा
अंत में, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारी, महंगाई और पहाड़ों से होते पलायन जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बचती रही। यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार केवल अपना राजनीतिक एजेंडा चलाने में व्यस्त है, जबकि जनता के जीवन से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर उसे कोई चिंता नहीं है।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं लाती है और सरकारी जमीनों के निजीकरण की योजना से पीछे नहीं हटती है, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर जन-आंदोलन शुरू करेगी

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