
देहरादून | उत्तराखंड वन विभाग में नए मुखिया (PCCF HoFF) की नियुक्ति को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। नए वन प्रमुख के चयन के लिए आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में वरिष्ठता के आधार पर 1993 बैच के आईएफएस (IFS) अधिकारी कपिल लाल के नाम पर सहमति बन गई है। 30 जून को वर्तमान पीसीसीएफ रंजन कुमार मिश्र के सेवानिवृत्त होने के बाद, 1 जुलाई से कपिल लाल कार्यभार संभाल सकते हैं।
इस बड़े बदलाव के साथ ही वन विभाग के शीर्ष से लेकर फील्ड स्तर तक बड़े पैमाने पर तबादलों और नई टीम के गठन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।
खबर एक नजर में :
- नए वन प्रमुख: 1993 बैच के आईएफएस अधिकारी कपिल लाल होंगे उत्तराखंड वन विभाग के नए मुखिया।
- लंबा कार्यकाल: कपिल लाल का सेवा कार्यकाल वर्ष 2031 तक है, जिससे उन्हें लगभग 5 साल का लंबा कार्यकाल मिलेगा।
- वाइल्डलाइफ प्रभार: वरिष्ठ अधिकारी नीना ग्रेवाल पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ के महत्वपूर्ण पद की प्रमुख दावेदार हैं।
- बड़ा फेरबदल: रंजन कुमार मिश्र की सेवानिवृत्ति के साथ ही वन पंचायतों, कैम्पा और फील्ड स्तर पर भी व्यापक स्तर पर जिम्मेदारियां बदलेंगी।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली बैठक में हुआ फैसला
हाल ही में मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में डीपीसी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में प्रमुख सचिव वन, वर्तमान पीसीसीएफ हॉफ रंजन कुमार मिश्र और भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मध्य प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक भी उपस्थित रहे। बैठक में विभाग के वरिष्ठतम अधिकारियों—कपिल लाल, नीना ग्रेवाल (दोनों 1993 बैच) और एसपी सुबुद्धि (1994 बैच)—के नामों पर चर्चा की गई।
वरिष्ठता और बेदाग सर्विस रिकॉर्ड के चलते राज्य सरकार ने कपिल लाल के नाम को प्राथमिकता दी है। उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच या शिकायत लंबित नहीं है।
नीना ग्रेवाल और एसपी सुबुद्धि को मिल सकती हैं नई जिम्मेदारियां
न केवल विभाग के मुखिया, बल्कि अन्य प्रमुख विंग्स में भी नए प्रभारियों की नियुक्ति के लिए मंथन शुरू हो गया है:
- पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ: रंजन कुमार मिश्र की सेवानिवृत्ति के बाद यह महत्वपूर्ण पद खाली हो रहा है। इस पद के लिए नीना ग्रेवाल का नाम सबसे आगे चल रहा है, जो वर्तमान में वन विकास निगम में प्रबंध निदेशक हैं। एसपी सुबुद्धि भी इस पद की दौड़ में शामिल हैं।
- कैम्पा और नियोजन: वर्तमान में कपिल लाल कैम्पा और नियोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके वन प्रमुख बनने के बाद इन महत्वपूर्ण प्रभारों को दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा जाएगा।
- वापसी करने वाले अफसरों को तैनाती: भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पूरी कर वापस लौटे वरिष्ठ अधिकारी बी.के. गांगटे को भी जल्द ही नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
फील्ड स्तर पर भी दिखेगा असर, तबादला सूची तैयार
नए मुखिया की ताजपोशी के साथ ही विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल होना तय है। सूत्रों के अनुसार, वन संरक्षकों, मुख्य वन संरक्षकों और अन्य मैदानी अधिकारियों के तबादलों की तैयारी पूरी कर ली गई है। हालांकि, सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक टलने के कारण फिलहाल तबादले रोके गए थे, लेकिन नए वन प्रमुख के कार्यभार संभालते ही उनकी प्राथमिकताओं के अनुसार नई तबादला सूची जारी की जा सकती है।
क्यों अहम है कपिल लाल का कार्यकाल?
उत्तराखंड वन विभाग के लिहाज से कपिल लाल की नियुक्ति नीतिगत स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सामान्य तौर पर पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के करीब होने के कारण बहुत कम समय मिलता है, लेकिन कपिल लाल के पास 2031 तक का लंबा कार्यकाल है। इतने लंबे समय में वे विभाग के भीतर वन संरक्षण, वनाग्नि नियंत्रण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और दीर्घकालिक योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर सकेंगे।
