UTTARAKHAND

देहरादून: हरेला पर्व पर मुख्यमंत्री धामी ने की पर्यावरण संरक्षण की नई पहल, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और शहीदों की स्मृति में हुआ वृक्षारोपण

देहरादून। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए वृक्षारोपण किया। इस वर्ष का कार्यक्रम ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की स्मृति को समर्पित किया गया, जिसने इस पारंपरिक उत्सव को एक नया और गहरा अर्थ प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और शहीदों के नाम पर पौधे लगाए। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत भी एक पौधा लगाया। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृत्व शक्ति को भी नमन करता है।

हरेला, जिसका अर्थ ‘हरियाली का दिन’ है, उत्तराखंड में श्रावण मास की शुरुआत का प्रतीक है और इसे प्रकृति, समृद्धि और अच्छी फसल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। यह पर्व कृषि आधारित समुदायों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उनके खेतों में बुवाई के चक्र की शुरुआत का प्रतीक है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों से अपने घरों, खेतों और खाली पड़ी जमीन पर पेड़ लगाकर हरियाली और खुशहाली में योगदान देने की अपील की। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार ने इस वर्ष 50 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। यह वृक्षारोपण अभियान 15 अगस्त तक वृहद स्तर पर चलाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सनातन संस्कृति में हमेशा से प्रकृति और धरती माता की पूजा की जाती रही है और हरेला पर्व हमें उनके प्रति हमारी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए वन क्षेत्र बढ़ाने के देश के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

इस कार्यक्रम के दौरान जम्मू के कठुआ में शहीद हुए सैनिकों और बिनसर वन्यजीव अभयारण्य में वनाग्नि में जान गंवाने वाले वन कर्मियों की याद में भी पौधे लगाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका बलिदान हमें राष्ट्र की रक्षा के लिए हमारे कर्तव्य की याद दिलाता है।

इस वर्ष हरेला उत्सव का समापन स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त को होगा, जिसमें विभिन्न गैर-सरकारी और सामाजिक संगठन एक करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। यह पहल उत्तराखंड के विकास मॉडल में पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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