
मुख्य बिंदु:
- पुराना हलफनामा वापस लिया: राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दायर शपथ पत्र वापस लिया; नया हलफनामा दाखिल करने के लिए 27 अगस्त तक का समय मांगा।
- 3 बड़े सचिवों को समन: 10 सितंबर की सुनवाई में सचिव कार्मिक शैलेश बगौली, सचिव वित्त दिलीप जावलकर और सचिव सैनिक कल्याण युगल पंत को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।
- सॉलीसिटर जनरल ने की पैरवी: केंद्र के सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (SGI) तुषार मेहता ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए नया हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।
- 22 हजार कर्मियों की नजरें: 2018 में हाईकोर्ट और 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी 22 हजार उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर एक साल से निर्णय लटका हुआ है।
देहरादून। उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) कर्मचारी संघ की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सरकार ने बीते दिन रजिस्ट्री में दायर किया गया अपना शपथ पत्र वापस ले लिया। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सरकार को नया शपथ पत्र दायर करने के लिए 27 अगस्त तक का समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर तय की है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से देश के सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (SGI) तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने हाईकोर्ट से नया और संशोधित शपथ पत्र दायर करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
हालांकि, बार-बार आदेश का अनुपालन न होने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि आखिर सरकार बार-बार अपने ही दिए आदेशों का अनुपालन क्यों नहीं कर रही है? अदालत हर बार सरकार को सुधार का अवसर दे रही है, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है।
10 सितंबर को कोर्ट में पेश होंगे ये 3 IAS/वरिष्ठ अधिकारी
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए 10 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दिन राज्य सरकार के तीन शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है:
- शैलेश बगौली (सचिव, कार्मिक व सतर्कता)
- दिलीप जावलकर (सचिव, वित्त)
- युगल पंत (सचिव, सैनिक कल्याण बोर्ड)
सुनवाई के दौरान उपनल कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकार उपनल कर्मियों से जबरन नए अनुबंध पत्र भरवा रही है, जो कि अवमानना की श्रेणी में आता है। सरकार द्वारा एक साल से आदेश के पालन के नाम पर केवल समय मांगे जाने से प्रदेश भर के उपनल कर्मियों में भारी रोष है।
क्या है 22 हजार उपनल कर्मियों का मामला?
- साल 2018 (हाईकोर्ट का आदेश): हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों को सरकारी नौकरियों में नियमित करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
- साल 2024 (सुप्रीम कोर्ट से झटका): राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई, लेकिन 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका खारिज करते हुए संविदा कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया।
- अवमानना याचिका: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी जब सरकार ने नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो उपनल संघ ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
अब हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रदेश के 22 हजार उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर जल्द बड़ा निर्णय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
