UTTARAKHAND

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा का नया अध्याय: बोर्ड खत्म होने के बाद कल से बदल जाएंगे मान्यता और पढ़ाई के नियम

  • कक्षा 1 से 8वीं तक जिला स्तर और 9वीं से 12वीं तक के मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से लेनी होगी मान्यता
  • अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव बोले- सभी समुदायों के बच्चों के लिए लागू होगा उत्तराखंड शिक्षा विभाग का सिलेबस, साथ में पढ़ सकेंगे धार्मिक शिक्षा

देहरादून।
उत्तराखंड की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश में 30 जून यानी आज से ‘उत्तराखंड मदरसा बोर्ड’ का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। इसके स्थान पर 1 जुलाई (कल) से ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ लागू होने जा रहा है। अब प्रदेश में संचालित सभी 452 मदरसों को संचालन के लिए इस नए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। इसके लिए उन्हें शिक्षा विभाग के कड़े मानकों पर खरा उतरना होगा।

इस बड़े बदलाव की खास बातें:

  • नया नियम: अब राज्य में केवल वही मदरसे चल सकेंगे जो शिक्षा विभाग की बिल्डिंग, भूमि और प्रशासनिक मानकों को पूरा करेंगे।
  • मदरसों की वर्तमान स्थिति: उत्तराखंड में इस समय कक्षा 1 से 8वीं तक के लगभग 400 और कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 55 मदरसे संचालित हो रहे हैं।
  • दोहरा पाठ्यक्रम: अल्पसंख्यक बच्चे अब उत्तराखंड शिक्षा विभाग के मुख्य सिलेबस के साथ-साथ अपनी धार्मिक शिक्षा भी ग्रहण कर सकेंगे।
  • मान्यता का स्तर: कक्षा 1 से 8 तक के मदरसों को जिला स्तर पर और 9वीं से 12वीं तक के मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त करनी होगी।

भूमिहीन मदरसों के सामने खड़ी होगी बड़ी चुनौती

उत्तराखंड में संचालित कई मदरसों के लिए यह नई व्यवस्था एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। दरअसल, राज्य के कई मदरसों के पास अपनी खुद की जमीन या भवन नहीं है और वे अब तक मदरसा बोर्ड की संपत्ति पर संचालित होते आ रहे हैं। चूंकि नए नियमों के तहत केवल उन्हीं शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता दी जाएगी जो उत्तराखंड शिक्षा विभाग के कड़े मानकों (जैसे पर्याप्त भूमि, भवन और प्रशासनिक ढांचा) को पूरा करेंगे, इसलिए भूमिहीन मदरसों को मान्यता मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

सभी अल्पसंख्यक समुदायों के लिए समान व्यवस्था

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि यह नई व्यवस्था केवल मुस्लिम समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध सहित सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों के लिए बनाई गई है। इन सभी अल्पसंख्यक विद्यालयों और मदरसों में उत्तराखंड शिक्षा विभाग का सिलेबस अनिवार्य रूप से लागू होगा।

शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं: विशेष सचिव

विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी छोटे या बड़े मदरसे तय मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें मान्यता नहीं दी जाएगी और मानकों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।

इस पहल के जरिए उत्तराखंड सरकार का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को राज्य की मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने संविधान के दायरे में रहते हुए इस अनूठी प्रक्रिया को अपनाया है।

Tv10 India

Recent Posts

कुंभ मेला 2027 की तैयारियां शुरू: उत्तराखंड को ₹7,000 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की सौगात, पहाड़ों में बिछेगा ‘स्पर सड़कों’ का जाल

सीएम पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की बैठक में बनी बड़ी सहमति…

3 hours ago

मिशन कुंभ 2027: उत्तराखंड के लिए ₹7,000 करोड़ के रोड प्रोजेक्ट्स को मंजूरी; पहाड़ों में आसान होगा सफर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में…

3 hours ago

अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट से दोषियों को बड़ा झटका, नहीं मिली जमानत; अगली सुनवाई 20 जुलाई को

आरोपी पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज…

4 hours ago

रुद्रप्रयाग: कंडारा गांव में पहाड़ी से मलबा हटाते वक्त मिली ‘स्वयंभू शिव परिवार’ की शिला, आस्था का नया केंद्र बना प्राचीन हनुमान मंदिर क्षेत्र

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले का कंडारा गांव इन दिनों आस्था और धार्मिक श्रद्धा का…

4 hours ago

मानसून से पहले राहत की खबर: देहरादून के नंदा की चौकी पुल का 95% काम पूरा, 10 दिन में शुरू होगी आवाजाही

पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई मिलकर बना रहे पुल, करीब 16 करोड़ रुपये आ रही लागत बादल…

4 hours ago