उत्तराखंड में वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक और बच्चों का पसंदीदा त्योहार फूलदेई पर्व आज से मनाया जा रहा है। यह पर्व चैत्र संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है और इसकी खास परंपराएं हैं।
बच्चे सुबह-सुबह फ्योली, बुरांस, पंय्या, आड़ू और अन्य रंग-बिरंगे फूल चुनकर कंडी (टोकरी) में रखते हैं। इसके बाद, वे घोघा माई के गीत गाते हुए घरों की देहरी पर फूल डालते हैं, जिससे घर-आंगन सुख-समृद्धि से भर जाए।
राज्य में कुछ क्षेत्रों में यह पर्व एक सप्ताह तक मनाया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर इसे दस दिनों तक मनाने की परंपरा है। फूल डालने वाले बच्चों को उपहार और आशीर्वाद दिए जाते हैं, जिससे उनका उत्साह और बढ़ जाता है।
कुछ गांवों में बच्चों ने पहले ही फूल चुनकर रख लिए थे, ताकि वे सुबह सही समय पर फूल डाल सकें। देवर खडोरा गांव के पंडित लक्ष्मी प्रसाद भट्ट और जैसाल गांव के पंडित सोनू जैसाली ने बताया कि शुक्रवार, चैत्र संक्रांति के अवसर पर यह पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और सभी के सुख-समृद्धि की कामना की।
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