UTTARAKHAND

UCC और धर्मांतरण कानून के बाद अब ‘जनसंख्या नियंत्रण’ की तैयारी? उत्तराखंड में भाजपा विधायक की मांग से सियासी हलचल तेज

मुख्य बिंदु:

  • मांग: भाजपा विधायक शिव अरोड़ा ने सदन में जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग उठाई।
  • प्रस्ताव: 3 से अधिक बच्चों वाले परिवारों की सरकारी सुविधाएं बंद करने का सुझाव।
  • सियासत: कांग्रेस ने इसे चुनावी एजेंडा और सांप्रदायिक कार्ड बताया।
  • इतिहास: उत्तराखंड पहले ही UCC और धर्मांतरण जैसे कानूनों पर देश में चर्चा का केंद्र रहा है।

देहरादून: समान नागरिक संहिता (UCC), सख्त धर्मांतरण कानून और मदरसा बोर्ड को भंग करने जैसे बड़े फैसलों के बाद अब उत्तराखंड में ‘जनसंख्या नियंत्रण कानून’ (Population Control Law) को लेकर बहस तेज हो गई है। आगामी चुनावों से ठीक पहले भाजपा के भीतर से ही इस कानून को लाने की मांग उठने लगी है, जिसने प्रदेश के सियासी पारे को गरमा दिया है।

विधानसभा में गूंजी जनसंख्या नियंत्रण की गूंज

इस चर्चा को तब बल मिला जब रुद्रपुर से भाजपा विधायक शिव अरोड़ा ने 12 मार्च 2026 को गैरसैंण सत्र के दौरान सदन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। माना जा रहा है कि विधानसभा के भीतर इस तरह की मांग उठना महज इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह सरकार की भविष्य की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

आंकड़ों के जरिए कानून की पैरवी

विधायक शिव अरोड़ा ने जनसंख्या के बदलते आंकड़ों का हवाला देते हुए इस कानून की जरूरत बताई। उनके मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:

  • जनसंख्या में वृद्धि: राज्य स्थापना के समय एक विशेष वर्ग की आबादी 14 प्रतिशत थी, जो 2011 की जनगणना के अनुसार बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है।
  • डेमोग्राफिक चेंज: पहले यह वृद्धि केवल मैदानी जिलों तक सीमित थी, लेकिन अब पर्वतीय क्षेत्रों में भी आबादी का संतुलन बदल रहा है।
  • सुविधाओं पर रोक: विधायक ने मांग की है कि जिन परिवारों में तीन से अधिक बच्चे हैं, उनकी सरकारी सुविधाएं समाप्त कर दी जानी चाहिए। उन्होंने केरल और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उत्तराखंड में जनसंख्या वृद्धि की दर चिंताजनक है।

सरकार का रुख: सामूहिक विचार के बाद होगा फैसला

इस संवेदनशील मुद्दे पर उत्तराखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास का कहना है कि भाजपा ‘सबका साथ सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसंख्या नियंत्रण कानून पर कोई भी अंतिम फैसला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सामूहिक विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।

विपक्ष का हमला: “सांप्रदायिक कार्ड खेल रही भाजपा”

दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने आरोप लगाया कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा ध्रुवीकरण के लिए इस तरह के मुद्दे उछालती है। कांग्रेस का मानना है कि भाजपा विकास के बजाय सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़कर वोट बैंक की राजनीति कर रही है।

धामी सरकार की ‘हिंदूवादी’ छवि और कड़े फैसले

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई कड़े फैसले लिए हैं:

  1. समान नागरिक संहिता (UCC): देश का पहला राज्य जिसने इसे लागू करने की पहल की।
  2. धर्मांतरण कानून: अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए जेल और जुर्माने का सख्त प्रावधान।
  3. मदरसा बोर्ड पर कार्रवाई: मदरसा बोर्ड को भंग कर नई शिक्षा व्यवस्था पर जोर।
  4. सर्वे: अल्पसंख्यकों की शिक्षा और आर्थिक स्थिति पर विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करना।

इन फैसलों ने जहां धामी सरकार की छवि को एक सशक्त हिंदूवादी नेतृत्व के रूप में स्थापित किया है, वहीं अब जनसंख्या नियंत्रण कानून की सुगबुगाहट ने प्रदेश में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। देखना होगा कि क्या उत्तराखंड चुनाव से पहले इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है।

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