खबर की मुख्य बातें (Key Highlights):
- फॉर्म 6, 7 और 8 की समीक्षा: नए वोटर बनने, नाम हटाने और विवरण सुधार से जुड़े आवेदनों के पारदर्शी व त्वरित निस्तारण के निर्देश।
- मैदानी जिलों पर विशेष नजर: देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों को नोटिसों की सुनवाई के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश।
- आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत: बारिश और दुर्गम इलाकों में BLOs खुद डाक्यूमेंट प्राप्त कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
- संवेदनशील संवाद: बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूर-दराज के मतदाताओं से स्थानीय भाषा में संवाद स्थापित करने की हिदायत।

देहरादून: उत्तराखंड में चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण के कार्यों की प्रगति को लेकर निर्वाचन आयोग पूरी तरह मुस्तैद है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने शनिवार को कुमांऊ और गढ़वाल के मंडलायुक्तों तथा प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
बैठक में मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 (नया नाम जोड़ना), फॉर्म 7 (नाम हटाना) और फॉर्म 8 (संशोधन) की अद्यतन स्थिति, बूथ-स्तरीय चुनौतियों और फील्ड विजिट की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।समीक्षा के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) और फील्ड स्टाफ दुर्गम परिस्थितियों में काफी मेहनत से काम कर रहे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि टीमों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ उनके विश्राम और सुरक्षा की उचित व्यवस्था की जाए।
डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा कि ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में खराब मौसम व यातायात बाधित होने से कई स्थानों पर पहुंचना कठिन हो रहा है। ऐसे स्थानों पर अधिकारी अधिक संवेदनशीलता बरतें। जहां बारिश के कारण आवाजाही प्रभावित है, वहां BLO अपने स्तर पर दस्तावेज प्राप्त कर रिपोर्ट तैयार करें ताकि प्रक्रिया रुके नहीं।
देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के DMs को विशेष निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी DMs से फॉर्म 6, 7 और 8 की वर्तमान स्थिति का ब्योरा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि:
- सत्यता और फॉलो-अप: आवेदनों की सत्यता की जांच और सही फॉलो-अप बेहद जरूरी है। अधिकारी फील्ड में जाकर मतदाताओं से संवाद करें ताकि कोई भ्रम न रहे।
- नोटिसों की त्वरित सुनवाई: देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे आपत्तियों और विसंगतियों वाले मामलों के निस्तारण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाएं, ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके।
- अनमैप्ड मतदाता: अनमैप्ड (Unmapped) मतदाताओं की सुनवाई के लिए ERO और AERO सुविधाजनक समय व स्थान निर्धारित करें, जिससे प्रभावित मतदाता आसानी से अपनी बात रख सकें।
मंडलायुक्तों से लिया फीडबैक, स्थानीय भाषा में संवाद के निर्देश
बैठक में गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप और कुमांऊ आयुक्त दीपक रावत ने हाल ही में किए गए अपने जिला भ्रमण का फीडबैक साझा किया। दोनों आयुक्तों ने फील्ड में आ रही चुनौतियों और जनता से मिले इनपुट के बारे में जानकारी दी। सीईओ ने दोनों आयुक्तों को लगातार फील्ड विजिट जारी रखने के निर्देश दिए।
इसके अलावा, सीईओ ने फील्ड टीमों को हिदायत दी कि वे मतदाताओं से बातचीत करते समय स्थानीय भाषा और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखें। खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और दूर-दराज के ग्रामीणों के साथ बातचीत में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
