देहरादून/उत्तराखंड: मोहल्ले की खराब स्ट्रीट लाइट और अंधेरी सड़कों की समस्या अब जल्द ही बीते दिनों की बात होने वाली है। शहरी विकास विभाग ने प्रदेश के सभी 108 नगर निकायों में स्ट्रीट लाइटों को हमेशा रोशन रखने और उनके त्वरित रखरखाव (मेंटेनेंस) के लिए एक बेहतरीन और स्थायी प्लान तैयार किया है।
अक्सर फंड की कमी के कारण नगर निगम और पालिकाएं खराब स्ट्रीट लाइटों को समय पर ठीक नहीं करा पाती थीं, लेकिन अब नए प्रपोजल से इस समस्या का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा।
क्या है सरकार का नया प्लान?
सड़कों पर लगातार रोशनी सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने ‘स्ट्रीट लाइट सरचार्ज’ का एक पारदर्शी मॉडल तैयार किया है। इसके तहत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में एक बेहद मामूली सरचार्ज जोड़ा जाएगा। उपभोक्ता जब अपना बिल भरेंगे, तो यह सरचार्ज सीधे यूपीसीएल (UPCL) के पास जाएगा और वहां से यह पैसा निकायों के ‘स्ट्रीट लाइट फंड’ के रूप में इस्तेमाल होगा।
आम जनता को इस फैसले से क्या होंगे सीधे फायदे?
क्यों पड़ी इस शानदार सिस्टम की जरूरत?
दरअसल, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी समेत कई जिलों के नगर निकायों पर यूपीसीएल का करोड़ों रुपये का बिल बकाया है। आय के सीमित साधन होने के कारण निकाय यह बिल नहीं चुका पाते और नई लाइटें लगाने या पुरानी ठीक करने में दिक्कत आती है। जनसुविधा का मामला होने के कारण बिजली विभाग कनेक्शन भी नहीं काट सकता।
ऐसे में यह नया प्रस्ताव एक ‘विन-विन सिचुएशन’ (Win-Win Situation) है। इससे यूपीसीएल को समय पर बिल मिलेगा, नगर निकायों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और सबसे बड़ी बात— आम जनता को 24 घंटे जगमगाती और सुरक्षित सड़कें मिलेंगी। इस प्रस्ताव को जल्द ही मुख्य सचिव के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
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