
देहरादून: उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू (इंफ्लुएंजा एच1एन1) के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। राज्य में स्वाइन फ्लू के तीन और नए मामलों की पुष्टि हुई है, जिसके बाद कुल संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 52 पहुंच गई है। वर्तमान में प्रदेश में 16 सक्रिय (एक्टिव) मरीज हैं, जिनका अलग-अलग सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
संक्रमण के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी देहरादून स्वाइन फ्लू से सबसे ज्यादा प्रभावित है। अब तक सामने आए कुल 52 मामलों में से अकेले 35 मरीज देहरादून जिले के हैं। बुधवार को मिले तीन नए मामलों में भी एक मरीज देहरादून का है, जबकि दो मरीज अन्य जिलों से हैं।
युद्ध स्तर पर तैयारी, अस्पतालों में बेड आरक्षित
संक्रमण की चेन को तोड़ने और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।
- सभी जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) को सक्रिय कर दिया गया है।
- किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए विशेष बेड आरक्षित किए गए हैं।
स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को पूरी तैयारी रखने और स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। शासन की ओर से बीमारी की रोकथाम के लिए विस्तृत एडवाइजरी भी जारी की गई है।
क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है, जो इंफ्लुएंजा ‘ए’ वायरस के एच1एन1 (H1N1) सबटाइप से फैलता है। वर्ष 2009 में फैली महामारी के दौरान सामने आए ‘ए(H1N1) पीडीएम09’ वायरस को स्वाइन फ्लू कहा गया था। इसे आम तौर पर मौसमी इंफ्लुएंजा के रूप में भी जाना जाता है।
बचाव और सावधानियां: लक्षण दिखते ही अपनाएं ये उपाय
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से सतर्कता बरतने की अपील की है:
- हाथों की स्वच्छता: हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
- मास्क का प्रयोग: घर से बाहर निकलने या भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।
- छींकते-खांसते समय सावधानी: खांसते या छींकते वक्त मुंह और नाक को रुमाल या कोहनी से ढकें।
- चेहरे को छूने से बचें: गंदे हाथों से आंख, नाक और मुंह को बार-बार न छुएं।
- डॉक्टर से सलाह: बुखार, खांसी या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें।
