Dharam Jyotish

धनतेरस पर क्यों होती है लक्ष्मी की पूजा, जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा

नई दिल्ली: दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि का वास होता है।लेकिन धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन का इतना महत्व क्यों है, इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है।

जब विष्णु जी ने दिया लक्ष्मी जी को श्राप

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु मृत्युलोक की यात्रा पर आ रहे थे, तब देवी लक्ष्मी ने भी उनके साथ चलने का आग्रह किया। विष्णु जी इस शर्त पर तैयार हुए कि लक्ष्मी जी उनकी हर बात मानेंगी। भूलोक पर आकर भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी को एक स्थान पर रुकने के लिए कहा और बोले, “जब तक मैं वापस न आऊं, तुम यहीं रहना। मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उस ओर मत आना।”

भगवान विष्णु के जाने के बाद मां लक्ष्मी के मन में जिज्ञासा हुई कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या है जिसके लिए उन्हें मना किया गया है। वह भगवान विष्णु के पीछे-पीछे चल पड़ीं। रास्ते में उन्हें सरसों का एक सुंदर खेत दिखा, जिसके फूलों से उन्होंने अपना श्रृंगार किया। आगे एक गन्ने का खेत मिला, जहां वह गन्ने चूसने लगीं।

उसी समय भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए और लक्ष्मी जी को किसान के खेत से चोरी करते देख क्रोधित हो गए। उन्होंने लक्ष्मी जी को श्राप दिया, “तुमने चोरी का अपराध किया है, इसलिए अब तुम 12 वर्षों तक इसी किसान की सेवा करोगी।”ऐसा कहकर भगवान विष्णु क्षीरसागर लौट गए।

किसान के घर हुआ लक्ष्मी का वास

लक्ष्मी जी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं। उन्होंने किसान की पत्नी से कहा कि वह स्नान करके पहले देवी लक्ष्मी की पूजा करे और फिर रसोई का काम करे, इससे वह जो भी मांगेगी उसे मिलेगा। किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया और देखते ही देखते किसान का घर धन-धान्य से भर गया।

इस तरह शुरू हुई धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा की परंपरा

12 वर्ष आनंद से बीत गए। जब भगवान विष्णु लक्ष्मी जी को लेने आए, तो किसान ने उन्हें भेजने से इनकार कर दिया। तब देवी लक्ष्मी ने किसान से कहा, “कल तेरस है। तुम घर को साफ-सुथरा कर, रात में घी का दीपक जलाकर और एक तांबे के कलश में धन भरकर मेरी पूजा करना। मैं उस कलश में निवास करूंगी, लेकिन तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी।”

लक्ष्मी जी ने वचन दिया कि इस एक दिन की पूजा से वह साल भर उसके घर से नहीं जाएंगी। अगले दिन किसान ने विधि-विधान से पूजा की और उसका घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया। माना जाता है कि तभी से हर साल कार्तिक मास की त्रयोदशी यानी धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की परंपरा शुरू हुई।

Tv10 India

Recent Posts

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: मदरसा बोर्ड खत्म, नया प्राधिकरण गठित

देहरादून: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म होगा, सरकार ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित कर…

21 hours ago

सीएम की समीक्षा बैठक के बाद बड़ा फैसला, निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग तेज होगी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वैश्विक निवेशक सम्मेलन में हुए एमओयू के…

21 hours ago

Mussoorie: प्रसिद्ध यात्रा लेखक पद्मश्री ह्यू गैंटज़र का निधन

मसूरी। प्रसिद्ध यात्रा लेखक और पद्मश्री सम्मानित ह्यू गैंटज़र का मंगलवार को 94 वर्ष की…

21 hours ago

रेल बजट में उत्तराखंड को बड़ी राहत: 4,769 करोड़ रुपये से रफ्तार पकड़ेंगी परियोजनाएं

देहरादून: रेल बजट से उत्तराखंड को इस साल 4,769 करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग समेत…

2 days ago

Union Budget 2026: सीएम धामी ने केंद्रीय बजट को बताया ‘विकसित भारत’ का आधार

देहरादून | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27…

3 days ago

मनरेगा से बेहतर वीबी जी रामजी योजना बेहतर, कांग्रेस का राम नाम का विरोध पुराना: रेखा

नानकमत्ता में वीबीजी रामजी योजना पर जिला सम्मेलन का आयोजनटीवी 10 इंडिया मीडिया नेटवर्कनानकमत्ता। कैबिनेट…

3 days ago