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विश्व डाक दिवस: डिजिटल युग में भी कायम है डाकघरों का महत्व, चिट्ठियों से आगे बढ़कर दे रहा हाईटेक सेवाएं

देहरादून: टेक्नोलॉजी और डिजिटलाइजेशन के इस दौर में जहां चिट्ठियों का चलन लगभग समाप्त हो गया है, वहीं भारतीय डाक विभाग ने समय के साथ खुद को अपग्रेड करते हुए अपनी प्रासंगिकता को न केवल बनाए रखा है, बल्कि और भी मजबूत किया है। हर साल 9 अक्टूबर को मनाया जाने वाला ‘विश्व डाक दिवस’ डाक सेवाओं के इसी बदलते स्वरूप और उनके महत्व को रेखांकित करता है।

एक समय था जब डाकिया घर-घर चिट्ठियां पहुंचाकर दिलों को जोड़ने का काम करता था, लेकिन आज वही डाकिया चलता-फिरता बैंक और आधार सेवा केंद्र बन गया है। उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में, जहां कई दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क और बैंकिंग सुविधाओं का अभाव है, डाक विभाग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

चिट्ठियों से कमर्शियल पार्सल और वित्तीय सेवाओं तक का सफर

आज डाकघर सिर्फ चिट्ठियां पहुंचाने तक सीमित नहीं हैं। विभाग ने खुद को कमर्शियल पार्सल और ई-कॉमर्स डिलीवरी के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्तराखंड में 17.90 लाख से अधिक स्पीड पोस्ट भेजे गए, जबकि अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 तक यह आंकड़ा 8.86 लाख को पार कर गया। इसी तरह, पार्सल की संख्या भी लाखों में है, जो दर्शाता है कि व्यापारिक और आधिकारिक दस्तावेज़ों के लिए डाक विभाग आज भी सबसे भरोसेमंद माध्यम है।

इसके अलावा, डाकघर अब एक बहुउद्देशीय सेवा केंद्र बन चुका है।उत्तराखंड की मुख्य पोस्टमास्टर जनरल शशि शालिनी कुजूर के अनुसार, विभाग लोगों की बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को अपग्रेड कर रहा है। आज डाकघर बचत खाता, सुकन्या समृद्धि योजना, राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक जैसी तमाम वित्तीय सेवाएं प्रदान कर रहा है।उत्तराखंड में इन योजनाओं के तहत 45.78 लाख से अधिक खाते सक्रिय हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 7.21 लाख नए खाते खोले गए, जबकि 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2025 के बीच 3.37 लाख से अधिक नए खाते खोले जा चुके हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां आज भी कई गांवों में बैंकों की शाखाएं नहीं हैं, डाकिया इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक ऐप के जरिए घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं दे रहा है।इसके साथ ही बच्चों का आधार एनरोलमेंट और आधार कार्ड में पता अपडेट करने जैसे महत्वपूर्ण काम भी डाकिए द्वारा किए जा रहे हैं। यह सुविधा उन ग्रामीणों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्हें इन कामों के लिए शहरों तक की लंबी यात्रा करनी पड़ती थी।

हाईटेक हो रहा डाक विभाग

डाक विभाग अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है।अब ओटीपी आधारित डिलीवरी शुरू की गई है, जिसमें पार्सल या स्पीड पोस्ट प्राप्त करने के लिए ग्राहक को पोस्टमैन को ओटीपी बताना होता है।इसके अलावा, घर बैठे पार्सल बुक करने की सुविधा और रियल-टाइम ट्रैकिंग जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं। विभाग प्रदेश के कई क्षेत्रों में हाईटेक एटीएम लगाने की प्रक्रिया में भी है, ताकि लोगों को नकदी निकालने में और आसानी हो।

विश्व डाक दिवस और राष्ट्रीय डाक सप्ताह

प्रत्येक वर्ष 9 अक्टूबर को ‘विश्व डाक दिवस’ मनाया जाता है, जो 1874 में स्विट्जरलैंड के बर्न में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) की स्थापना की वर्षगांठ का प्रतीक है।भारत में इस अवसर पर 6 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक ‘राष्ट्रीय डाक सप्ताह’ का आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को डाक विभाग की कार्यप्रणाली और योजनाओं से अवगत कराया जाता है।भारत 1 जुलाई 1876 को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बना था और ऐसा करने वाला एशिया का पहला देश था।

यह स्पष्ट है कि बदलते समय के साथ डाक विभाग ने न केवल अपने अस्तित्व को बचाए रखा है, बल्कि एक आधुनिक और विश्वसनीय सेवा प्रदाता के रूप में अपनी पहचान को और भी पुख्ता किया है। चिट्ठियों के दौर से निकलकर आज यह डिजिटल और वित्तीय समावेशन का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है।

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