उत्तरकाशी, उत्तराखंड। भैया दूज के पावन अवसर पर आज यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।कपाट बंदी से पूर्व जब मंदिर का ‘खजाना’ खोला गया तो इस यात्रा वर्ष में मंदिर समिति को लगभग 50 लाख रुपये की आय होने की जानकारी मिली।इस सीजन में 6,45,000 श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और चढ़ावा चढ़ाया।
यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल और कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल ने बताया कि इस बार दान पात्रों और रसीद बुकों के माध्यम से यह आय हुई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या और आय में मामूली कमी दर्ज की गई है।
विधि-विधान से बंद हुए कपाट
गुरुवार दोपहर 12:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।इस पारंपरिक अवसर पर मां यमुना के भाई शनिदेव महाराज की डोली उनके गांव खरसाली से यमुनोत्री धाम पहुंची।शनिदेव महाराज ने यमुना नदी में स्नान कर अपनी बहन के साथ विशेष पूजा में भाग लिया, जिसके बाद कपाट बंदी की प्रक्रिया संपन्न हुई।
कपाट बंद होते ही पूरा धाम “जय मां यमुना” के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद मां यमुना की उत्सव डोली को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल, खरसाली गांव के लिए रवाना किया गया।अब अगले छह माह तक श्रद्धालु खरसाली में ही मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे।
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