उत्तरकाशी, उत्तराखंड। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद, भैया दूज के पावन अवसर पर आज मां गंगा की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव में विराजमान हो गई है। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भक्तिमय माहौल के बीच जैसे ही डोली मुखबा स्थित गंगा मंदिर पहुंची, ग्रामीणों ने धूप, दीप और फूल-मालाओं से अपनी ‘धियाणी’ (बेटी) का भव्य स्वागत किया।
मां गंगा के मायके मुखबा में विराजमान होने के साथ ही उनके तीन दिवसीय निर्वाण दर्शन भी शुरू हो गए हैं। अब अगले छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहीं पर मां गंगा की पूजा-अर्चना और दर्शन कर सकेंगे।
इससे पहले, बुधवार को गंगोत्री से विदा होने के बाद मां गंगा की डोली ने रात्रि विश्राम मुखबा से तीन किलोमीटर पहले चंडेश्वरी मंदिर में किया था। आज सुबह समेश्वर देवता (शनि महाराज) की अगुवाई में डोली ने मुखबा के लिए प्रस्थान किया। पूरे रास्ते श्रद्धालु मां गंगा के जयकारे लगाते हुए डोली के साथ चलते रहे। मुखबा गांव में इस उत्सव को लेकर खासा उत्साह देखा गया और घरों को पारंपरिक ऐपण और फूलों से सजाया गया था।
मंदिर के पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मां गंगा की भोग मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया। इस अवसर पर गंगोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु मौजूद रहे।
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