
नैनीताल | उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विकासनगर के भीमावाला स्थित ‘साईं कृपा स्टोन क्रशर’ को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने क्रशर के संचालन पर लगी अंतरिम रोक को हटा दिया है। कोर्ट ने यह फैसला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और विशेषज्ञ समितियों की उस रिपोर्ट के आधार पर लिया है, जिसमें क्रशर को प्रदूषण मानकों के अनुरूप पाया गया है।
खबर की बड़ी बातें:
- राहत: 25 जुलाई 2025 को लगा स्टे (Stay) कोर्ट ने निरस्त किया।
- आधार: वायु गुणवत्ता और ध्वनि स्तर जांच में निर्धारित मानकों के भीतर मिले।
- तर्क: सीपीसीबी (CPCB) के 2023 के दिशा-निर्देशों को अनिवार्य नहीं माना गया।
- अगली सुनवाई: मामला अब 4 मई 2026 से शुरू होने वाले हफ्ते में सुना जाएगा।
दरअसल, याचिकाकर्ता स्कंद कुमार सिंह ने आरोप लगाया था कि संबंधित साईं कृपा स्टोन क्रशर घनी आबादी, सरकारी इंटर कॉलेज, आंगनवाड़ी केंद्र और ग्राम पंचायत कार्यालय के करीब स्थापित किया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है.
याचिका में ये भी कहा गया था कि क्रशर यूनिट 200 मीटर की निषिद्ध दूरी के भीतर स्थापित की जा रही है. इससे क्षेत्र में पर्यावरण, स्थानीय निवासियों एवं स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के जुलाई 2023 के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होने का भी आरोप लगाया गया.
प्रारंभिक सुनवाई में न्यायालय ने 25 जुलाई 2025 को प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए क्रशर के निर्माण और संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी थी. न्यायालय ने ये माना था कि क्रशर निर्धारित जोन में नहीं है और सीपीसीबी के दिशा-निर्देशों के विपरीत है.
इसके बाद साईं कृपा स्टोन क्रशर के स्वामी ने इस रोक को हटाने के लिए आवेदन दाखिल किया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वो इस मामले में जल्द सुनवाई कर उचित आदेश पारित करें.
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं विशेषज्ञ समितियों की ओर से कई बार निरीक्षण किए गए. इन निरीक्षणों में पाया गया कि क्रशर यूनिट की उत्पादन क्षमता, वायु गुणवत्ता और ध्वनि स्तर सभी निर्धारित मानकों के भीतर हैं.
विशेष रूप से 16 से 18 फरवरी 2026 के बीच तीन सदस्यीय समिति की ओर से किए गए परीक्षण में ये सामने आया कि यूनिट की कार्यप्रणाली और पर्यावरणीय प्रभाव निर्धारित सीमाओं के अनुरूप है. इसके अलावा ट्रायल रन के दौरान भी प्रदूषण स्तर सुरक्षित पाया गया.
क्रशर स्वामी ने न्यायालय को ये भी बताया कि क्रशर यूनिट को पहले ही साल 2024 में लीज और 2025 में संचालन की अनुमति मिल चुकी थी. यह याचिका दायर होने से पहले ही कार्यरत थी. साथ ही ये भी तर्क दिया गया कि सीपीसीबी के दिशा-निर्देश बाध्यकारी नहीं हैं.
सभी पक्षों की दलीलों और निरीक्षण रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने पाया कि क्रशर यूनिट के खिलाफ जारी अंतरिम आदेश जारी रखने का कोई ठोस आधार नहीं है. इसी आधार पर कोर्ट ने 25 जुलाई 2025 का अंतरिम आदेश निरस्त कर दिया.
फिलहाल स्टोन क्रशर को मिली राहत: आगे की सुनवाई के लिए मामले को 4 मई 2026 से शुरू होने वाले हफ्ते में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल, साईं कृपा स्टोन क्रशर को नैनीताल हाईकोर्ट से राहत मिल गई है.
